विदिशा
आरटीआइ कार्यकर्ता की हत्या के मामले में पुलिस ने तीन ठेकेदारों सहित शूटर और एक अन्य आरोपित को गिरफ्तार किया है। घटना के दूसरे दिन ही पुलिस ने पांचों को गिरफ्तार कर हत्याकांड का पर्दाफाश कर दिया। शुक्रवार को प्रेसवार्ता कर एसपी डा मोनिका शुक्ला ने बताया कि पुरानी रंजिश और चेक बाउंस के एक केस के चलते पीडब्ल्यूडी के तीन ठेकेदारों ने विदिशा के अंकित यादव उर्फ टुंडा को रंजीत की हत्या की सुपारी दी। टुंडा ने माउजर से रंजीत सोनी की हत्या की और रायसेन जिले के जुनियापुल गांव में अपने मामा के घर चला गया।

एसपी ने बताया कि ठेकेदार जसवंत रघुवंशी, एस कुमार चौबे और नरेश शर्मा का रंजीत सोनी से पुराना ठेकेदारी का कुछ विवाद चल रहा था। मृतक रंजीत पहले पीडब्ल्यूडी में ठेकेदारी करता था, इसलिए इनके बीच पैसों का लेन-देन भी था। तीनों ठेकेदारों पूछताछ में बताया कि रंजीत ने उन्हें ठेकेदारी में बहुत नुकसान पहुंचाया था। ठेकेदार जसवंत को रंजीत से 4 लाख 60 हजार रुपये लेना थे, रंजीत ने 2016 में एक चेक दिया था, जो बाउंस हो गया। जसवंत ने रंजीत के ऊपर चेक बाउंस का केस लगा दिया जो सीजेएम न्यायालय में विचाराधीन है। इसी मामले में शुक्रवार तीन जून को पेशी भी होनी थी।

एसपी ने बताया कि 2017 में ठेकेदार जसवंत, एश कुमार चौबे और नरेश शर्मा ने रंजीत के खिलाफ सड़क दुर्घटना का केस दर्ज कराया। रंजीत ने भी इनके खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी तरह इनके बीच विवाद बढ़ता गया। इससे परेशान होकर तीनों ठेकेदारों ने रंजीत ही हत्या की साजिश रची। चौबे ने अपने परिचित शैलेंद्र पटेल के माध्यम से टुंडा से मुलाकात की। टुंडा को 6 लाख रुपये में रंजीत की हत्या की सुपारी दी गई। 25 हजार रुपये एडवांस भी दिए गए। गुरुवार शाम को मौका देखकर सुपारी किलर टुंडा ने रंजीत को पीछे से सिर में गोली मारी और फरार हो गया। पुलिस ने सभी आरोपितों को गिरफ्तार का न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

By kgnews

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