पेंड्रा। वन्य प्राणियों के शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में आने की खबर अब पुरानी हो गई है। अब तो ये घरों में भी घुसने लगे हैं। कांकेर के एक रिहायशी अपार्टमेंट में दो भालुओं के घुसने के बाद अब पेंड्रा में भी ऐसी घटना घटी है। इन घटनाओं के बाद अब लोग वन विभाग की निष्क्रियता पर भी सवाल उठा रहे हैं।

दरअसल पेंड्रा जिले के पिपरिया गांव में देर रात एक भालू ने घर में घुसकर तहलका मचा दिया। यह घटना तब हुई जब भालू ने घर का दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया और रसोई में रखी मिठाई और अन्य सामान खा गया। घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है। घर के सदस्य इस हमले में बाल-बाल बच गए और किसी तरह भालू को बाहर खदेड़ने में सफल हुए, लेकिन भालू बार-बार वापस घर की ओर आने की कोशिश कर रहा था।

पिपरिया गांव के निवासियों ने बताया कि पिछले एक महीने से भालू लगातार कई घरों में खाने की तलाश में घुस रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि भालुओं के इस तरह से मानव बस्तियों में घुसने का मुख्य कारण जंगलों में अवैध पेड़ों की कटाई, कब्जा, और बिजली के तारों से की गई फेंसिंग है। इस वजह से भालू समेत अन्य वन्य जीवों को जंगल में सुरक्षित भोजन की कमी हो रही है और वे आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने लगे हैं।

हालांकि, वन विभाग को भालुओं की बढ़ती गतिविधियों की सूचना कई बार दी जा चुकी है, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों ने विभाग पर वन्य जीव संरक्षण की योजनाओं को धरातल पर लागू न करने का भी आरोप लगाया है। जामवंत योजना, जो भालुओं के संरक्षण के लिए बनाई गई है, केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों में इस योजना के नाम पर सिर्फ कुछ बोर्ड ही दिखते हैं, जबकि वास्तविक रूप से इसका कोई ठोस परिणाम नहीं दिख रहा है।

इस घटना के बाद से गांव के लोगों में भय और आक्रोश व्याप्त है, और वे वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

By kgnews

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