रायपुर। बिहार में जारी मतदाता सूची पुनरीक्षण के बीच भारतीय निर्वाचन आयोग ने शनिवार को बूथ लेवल अधिकारियों के पारिश्रमिक में वृद्धि करने का फैसला किया है। इस संबंध में चुनाव आयोग की तरफ से अधिसूचना भी जारी की गई है। जिसमें आयोग ने अपने फैसले के बारे में बताया। अधिसूचना के मुताबिक, बूथ लेवल अधिकारी को पहले 6 हजार रुपए की राशि मिलती थी, जिसे बढ़ाकर अब 12 हजार रुपए कर दिया गया है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण में शामिल बूथ लेवल अधिकारियों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को एक हजार रुपए से बढ़ाकर अब दो हजार रुपये कर दिया गया है। वहीं, बूथ लेवल पर्यवेक्षक को पहले 12 हजार रुपए मिलते थे, जिसे बढ़ाकर अब 18 हजार रुपए कर दिया गया है। असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर को मिलने वाला पारिश्रमिक अब 25 हजार रुपए है, जबकि इलेक्ट्रॉल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर का पारिश्रमिक 30 हजार रुपए कर दिया गया है।
वहीं, निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की अहम भूमिका को भी रेखांकित किया। आयोग ने कहा कि मतदाता सूची किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशीला होती है, जिसे हमारे आयोग के अधिकारी मिलकर तैयार करते हैं। इसी को देखते हुए हमने उनके पारिश्रमिक को बढ़ाने का फैसला किया है। चुनाव आयोग ने अपनी अधिसूचना में बताया कि इससे पहले अधिकारियों को मिलने वाले पारिश्रमिक में ऐसा संशोधन 2015 में किया था। इसके अलावा, ऐसा पहली बार हुआ है जब असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर और इलेक्ट्रॉल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर को मानदेय देने का फैसला किया है।
बता दें कि बिहार में अभी मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी है, जिसके तहत फर्जी मतदाताओं को चिन्हित किया जा रहा है। केंद्र सरकार का कहना है कि बांग्लादेश और नेपाल के कई नागरिक फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर भारतीय नागरिकता प्राप्त कर चुके हैं और यहां का लाभ उठा रहे हैं। लिहाजा ऐसे लोगों को चिन्हित करने के लिए मतदाता सूची पुनरीक्षण जरूरी है। इसके तहत फर्जी मतदाताओं को चिन्हित किया जा रहा है।
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