धान उठाव में एमसीबी जिला बना मिसाल, 45 प्रतिशत से अधिक धान का सुरक्षित परिवहन पूर्ण

एमसीबी/ धान खरीदी वर्ष 2025-26 के अंतर्गत जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में उपार्जित धान का उठाव कार्य तेज, सुव्यवस्थित और पूरी तरह किसान हितैषी तरीके से संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सशक्त नेतृत्व और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के परिणामस्वरूप जिले में धान उठाव की प्रक्रिया निरंतर सुचारू रूप से आगे बढ़ रही है, जिससे उपार्जन केंद्रों से धान का सुरक्षित और समयबद्ध परिवहन सुनिश्चित हो रहा है।


जिले में अब तक कुल 8,79,848.60 क्विंटल धान का उपार्जन किया गया है, जिसमें से 4,00,910.00 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक उठाव हो चुका है। यह कुल उपार्जित धान का लगभग 45.57 प्रतिशत है। शेष 4,78,938.60 क्विंटल धान उपार्जन केंद्रों में सुरक्षित रूप से संग्रहित है, जिसे उठाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा चरणबद्ध और प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।


उपार्जन केंद्रवार उठाव की स्थिति पर नजर डालें तो कछौड़ से 10,940 क्विंटल, केल्हारी से 37,410 क्विंटल, कटकोना से 1,790 क्विंटल, कोड़ा से 16,970 क्विंटल, कौड़ीमार से 35,260 क्विंटल, खड़गवां से 20,930 क्विंटल, बरदर से 29,890 क्विंटल, रतनपुर से 19,650 क्विंटल, सिंगहत से 15,190 क्विंटल, कुंवारपुर से 14,420 क्विंटल, घुटरा से 23,330 क्विंटल, कठौतिया से 22,400 क्विंटल, चैनपुर से 30,860 क्विंटल, नागपुर से 24,040 क्विंटल, बंजी से 17,740 क्विंटल, जनकपुर से 11,410 क्विंटल, बहरासी से 6,240 क्विंटल, डोडकी से 18,960 क्विंटल, माड़ीसरई से 11,620 क्विंटल, सिंगरौली से 900 क्विंटल तथा बरबसपुर से 30,960 क्विंटल धान का उठाव किया जा चुका है। कई केंद्रों पर उठाव शून्य रहने के बावजूद वहां भी आगामी दिनों में कार्य तेज करने की तैयारी की जा चुकी है।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में धान उठाव को केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसानों के विश्वास और उनकी मेहनत के सम्मान से जुड़ा दायित्व माना जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से प्रत्येक उपार्जन केंद्र की सतत निगरानी की जा रही है, ताकि शेष धान का उठाव समय पर, सुरक्षित और बिना किसी असुविधा के पूरा किया जा सके।


कुल मिलाकर धान खरीदी वर्ष 2025-26 में जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर का धान उठाव कार्य एक सशक्त और अनुकरणीय उदाहरण के रूप में सामने आया है। सुनियोजित कार्यप्रणाली, बेहतर प्रशासनिक समन्वय और मुख्यमंत्री की किसान हितैषी सोच के चलते यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि उपार्जित धान का उठाव पूरी पारदर्शिता, दक्षता और समयबद्धता के साथ संपन्न हो।

By kgnews

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