रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद की समस्या दशकों से विकास और शांति की राह में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई थी। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। राज्य सरकार और केंद्रीय सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों से दंतेवाड़ा, बीजापुर और आसपास के इलाकों में नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई जारी है, जिसका असर जमीन पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। इस परिवर्तन की एक बड़ी वजह है ‘नियद नेल्ला नार’ जैसी विकासपरक योजनाएं, जिन्होंने जनता और शासन के बीच विश्वास की एक मजबूत कड़ी का काम किया है।
1977 से नक्सली समस्या को किसी भी सरकार ने आज तक गंभीरता से नहीं लिया था, जिसके कारण बस्तर जैसे आदिवासी क्षेत्र में जहां अमूल्य वन-धन संपदा है नक्सल समस्या दिन प्रतिदिन गहराती जा रही थी, जो ग्रामीण आबादियों को प्रभावित करते गई लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने नक्सल समस्या को गंभीरता से ध्यान में देते हुए राज्य सरकार के साथ मिलकर जिस तरीके से नक्सल समस्या को खत्म करने का बीड़ा उठाया है वह एक सराहनीय कदम है और गंभीरता से निशाना लगाना साथ ही निशाने पर काम करने वाला विषय टारगेट बनाकर देश के गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव सरकार ने पिछले डेढ़ सालों में कर दिखाया है और जो मिशन टारगेट का है आगामी 2026 में मार्च के पहले नक्सली समस्याओं का खत्म करने का जो टारगेट साय सरकार ने चुनौती के तौर पर लिया है जिस तरीके से अभी कार्रवाई चल रही है और मुठभेड़ जारी है, नक्सल समस्या का समाधान के लिए राज्य सरकार गंभीरता से दिन-रात मेहनत करके कार्य कर रही है उसका परिणाम आशा जनक और टारगेट को पूरा करता हुआ दिख रहा है बस्तर में नगरनार की समस्याओं का भी निदान जल्द से जल्द होता दिख रहा है जिस तरीके से राज्य सरकार के दिशा निर्देशों से अर्ध सैनिक बल और राज्य की पुलिस संयुक्त रूप से मिलकर नक्सल मूवमेंट के खिलाफ दिन-रात मुठभेड़ कर सफलता पा रही है उसे ऐसा प्रतीत होता है कि हमारा राज्य बहुत जल्द नक्सल समस्या से उबर कर सामने आएगा इसके लिए वर्तमान विष्णुदेव सरकार बधाई के पात्र है।

सबसे बड़ी मुठभेड़: 31 नक्सली ढेर, 210 बंकर तबाह
हाल ही में दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों की सीमा पर सुरक्षा बलों ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। इस अभियान में कुल 31 हार्डकोर नक्सली मारे गए, जिन पर कुल मिलाकर 1.72 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। साथ ही इस अभियान में 210 से अधिक नक्सली बंकरों को भी नष्ट कर दिया गया। यह मुठभेड़ राज्य के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई मानी जा रही है। इस ऑपरेशन की सफलता के पीछे थी लंबी योजना, कड़ी रणनीति और सुरक्षा बलों की अदम्य साहस। इस अभियान ने न केवल माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका दिया, बल्कि स्थानीय जनता में भी सुरक्षा और शांति की एक नई आशा जगाई है।
डेढ़ साल में 500 से अधिक नक्सली मारे गए
छत्तीसगढ़ में पिछले डेढ़ साल (लगभग जनवरी 2024 से मई 2025 तक) में नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए विभिन्न अभियानों में लगभग 500 से अधिक नक्सली मारे गए हैं। 2024 में पूरे साल में लगभग 219-257 नक्सली मारे गए थे। मुठभेड़ों के आंकड़े…
16 अप्रैल 2024, कांकेर: 29 नक्सली मारे गए।
4 अक्टूबर 2024, दंतेवाड़ा-नारायणपुर: 35 नक्सली ढेर, जो 2024 की सबसे बड़ी मुठभेड़ थी।
10 मई 2024, बीजापुर: 12 नक्सली मारे गए।
2025 में (जनवरी-मई): इस अवधि में लगभग 134-325 नक्सली मारे गए है।
9 फरवरी 2025, बीजापुर: 31 नक्सली ढेर।
20 मार्च 2025, बीजापुर और कांकेर: 30 नक्सली मारे गए।
21 जनवरी 2025, गरियाबंद: 18-27 नक्सली मारे गए।
मई 2025, बीजापुर: ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट और अन्य अभियानों में 15-31 नक्सली मारे गए।
मुख्यमंत्री ने किया वीर जवानों का सम्मान
इस सफल अभियान के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बीजापुर जिले के सुदूर गांव गलगम का दौरा किया और इस ऑपरेशन में शामिल सुरक्षा बलों के जवानों से भेंट की। उन्होंने जवानों के साहस और समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा, “यह सफलता नक्सलवाद मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यह राज्य सरकार और सुरक्षा बलों की साझा रणनीति और इच्छाशक्ति का परिणाम है।” मुख्यमंत्री ने “नियद नेल्ला नार” योजना की भी चर्चा की, जो सरकार द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास बहाली और विकास को प्राथमिकता देने के लिए शुरू की गई एक विशेष पहल है।
क्या है ‘नियद नेल्ला नार’ योजना? अपना अच्छा गांव
गोंडी भाषा में ‘नियद नेल्ला नार’ का अर्थ है – ‘अपना अच्छा गांव’। यह योजना छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा उन इलाकों में लागू की जा रही है जहां नक्सलियों की वजह से लंबे समय से शासन की सीधी पहुंच नहीं थी। इस योजना का उद्देश्य है नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्रों में सुरक्षा कैम्पों को सुविधा केंद्रों में परिवर्तित करना और ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पानी, सड़क और राशन जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना। सुरक्षा और सेवा को एक साथ जोड़कर इस योजना ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में एक नई सामाजिक संरचना को जन्म दिया है, जिसमें नागरिकों की भागीदारी बढ़ी है और शासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।
आत्मसमर्पण की लहर: 26 हार्डकोर नक्सलियों ने छोड़ा हथियार
सरकार की पुनर्वास नीति-2025 और सुरक्षा बलों के दबाव के कारण नक्सलियों में भय का माहौल व्याप्त है। इसका परिणाम यह हुआ है कि हाल ही में दंतेवाड़ा में 26 हार्डकोर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया, जिनमें से कई पर लाखों रुपये के इनाम थे। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों को सरकार द्वारा पुनर्वास के तहत आर्थिक सहायता, कृषि भूमि, मकान, और स्वरोजगार की सुविधा दी जा रही है। यह पहल इस दिशा में बड़ा संदेश है कि हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों के लिए समाज और शासन में जगह है।
केंद्रीय सहयोग से मजबूत हुई रणनीति
छत्तीसगढ़ की साय सरकार को केंद्र सरकार का पूरा सहयोग मिल रहा है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के विस्तार का सुझाव देते हुए इसके दायरे को पांच किलोमीटर से बढ़ाकर दस किलोमीटर करने का प्रस्ताव रखा है, ताकि अधिक से अधिक गांवों को इसका लाभ मिल सके। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों की कमर टूट चुकी है, अब वे डर के मारे सीमावर्ती राज्यों में भागने लगे हैं। माओवादियों के दिन अब गिने-चुने रह गए हैं।
पुनर्वास नीति बनी आदर्श
राज्य सरकार की पुनर्वास नीति-2025 को देश की सबसे प्रभावी नीति माना जा रहा है। इसमें आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के लिए सुरक्षा, रोजगार, शिक्षा, और सामाजिक पुनर्वास की विस्तृत व्यवस्था की गई है। इस नीति ने नक्सलियों के भीतर से ही उनके नेटवर्क को कमजोर करने का काम किया है।
जनसहयोग और प्रशासनिक इच्छाशक्ति का संगम
निर्धारित लक्ष्य 2026 मार्च तक छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बना दिया जाएगा। यह कोई कोरी कल्पना नहीं, बल्कि योजनाबद्ध प्रयासों, मजबूत इच्छाशक्ति और जनता के सहयोग से संभव होती सच्चाई है। ‘नियद नेल्ला नार’ के जरिए शासन ने यह दिखाया है कि केवल हथियारों से नहीं, बल्कि विश्वास और विकास के माध्यम से भी नक्सलवाद को हराया जा सकता है। दंतेवाड़ा और बीजापुर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में बदलाव की बयार बह रही है। जहां पहले शासन का नाम लेना भी मुमकिन नहीं था, आज वहां प्रशासनिक कैंप, स्कूल, अस्पताल, और बिजली-पानी की सुविधा पहुंच रही है। ‘नियद नेल्ला नार’ अब सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि एक आंदोलन बन चुका है – विश्वास, सुरक्षा और विकास का आंदोलन। छत्तीसगढ़ की यह निर्णायक लड़ाई अब अपने अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और केंद्र सरकार के सहयोग से बस्तर की यह धरती बहुत जल्द नक्सल आतंक के साये से मुक्त होकर विकास और शांति की ओर अग्रसर होगी।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बस्तर दौरा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 4-5 अप्रैल 2025 को छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का दौरा किया, जो नक्सलवाद के खिलाफ अभियानों और क्षेत्रीय विकास के संदर्भ में महत्वपूर्ण रहा। अमित शाह ने दंतेवाड़ा में बस्तर पंडुम 2025 कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जो बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा देने वाला एक भव्य उत्सव है। लोक कलाकारों को सम्मानित किया और आदिवासी नृत्य, लोकगीत, पारंपरिक वाद्ययंत्र, वेशभूषा, शिल्प-चित्रकला और आदिवासी व्यंजनों जैसी सात प्रमुख विधाओं में प्रतियोगिताओं का उल्लेख किया। केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने इस आयोजन को बस्तर की संस्कृति को संरक्षित करने और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने बस्तर में नक्सल-विरोधी अभियानों की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की थी। नक्सलियों से हथियार डालने और मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की, 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य है।

डेढ़ साल में हजारों नक्सलियों ने किये सरेंडर
छत्तीसगढ़ में पिछले डेढ़ साल (लगभग नवंबर 2023 से मई 2025 तक) में लगभग 750 से 1045 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। यह आंकड़ा विभिन्न समाचार स्रोतों, सरकारी बयानों और वेब पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर अनुमानित है। नक्सली विचारधारा से मोहभंग: कई नक्सलियों ने माओवादी विचारधारा को “खोखला और अमानवीय” बताते हुए आत्मसमर्पण किया।
नियद नेल्ला नार छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, विशेष रूप से बस्तर संभाग के दूरस्थ गाँवों में बुनियादी सुविधाएँ और विकास कार्य पहुँचाना है। इस योजना का नाम स्थानीय आदिवासी भाषा (हल्बी/गोंडी) से लिया गया है, जिसमें इसका मतलब है “अपना अच्छा गाँव”। वनांचल के आदिवासी अब खुला पन महसूस कर रहे है, सरकार के कामकाज पर भरोसा जता रहे है, सभी योजनाओं का लाभ मिलने से खुशी की लहर छाई हुई है। यह योजना नक्सलवाद को कम करने और आदिवासी समुदायों को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए शुरू की गई है।
