कोरबा। आगामी सप्ताह कक्षा दसवीं एवं बारहवीं बोर्ड परीक्षाओं के परीक्षा परिणाम घोषित किए जाएंगे। परीक्षा परिणाम घोषित होने के पूर्व तनाव एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, किंतु कई बच्चे बेहतर परीक्षा परिणाम नहीं आने के कारण तनाव के कारण अवसाद ग्रस्त हो जाते हैं। यह समय बच्चों और उनके पालकों के लिए अत्यंत संवेदनशील होता है। कलेक्टर अजीत वसंत ने जिला शिक्षा अधिकारी टी पी उपाध्याय को परीक्षा परिणाम को लेकर विद्यार्थियों में होने वाले तनाव को दूर करने हेतु विस्तृत कार्य योजना बनाकर कार्य करने के लिए कहा। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को जिले  के सभी शासकीय एवं अशासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों के प्राचार्यों की   बैठक लेकर विद्यार्थियों को तनाव से दूर करने हेतु एक अच्छा माहौल बनाने के निर्देश दिए। जिसमें शिक्षा विभाग के अधिकारी, प्राचार्य और सभी शिक्षक सम्मिलित होंगे। साथ ही  विद्यार्थियों की काउंसलिंग कराने की बात कही। कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया की परीक्षा का तनाव अपनी जगह है परंतु तनाव के कारण हमारे जिले में एक भी बच्चा अप्रिय कदम ना उठाएं, इसके लिए  सबको मिलकर प्रयास करना होगा। इसके लिए अधिकारी गण, प्राचार्य शिक्षक गण और पालक सभी अपनी-अपनी भूमिका को समझें और बच्चे को अवसाद से बाहर करते हुए उन्हें बताएं की बोर्ड परीक्षा अंतिम परीक्षा नहीं है। बच्चों के सामने समाज के कुछ अच्छे उदाहरण रख कर उन्हें उज्जवल भविष्य के लिए प्रेरित किया जा सकता है। कलेक्टर ने वीडियो कॉन्फ्रेंस/ गूगल मीट/सोशल मीडिया के माध्यम से जिले के वरिष्ठ अधिकारी,  प्रमुख शिक्षाविद, मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सको से बच्चों का सीधे वर्चुअली संवाद कराने की बात कही। जिससे बच्चों का मार्गदर्शन एवं उत्साहवर्धन किया जा सके। वर्चुअली कार्यक्रम से जुड़ने का दिन समय व लिंक के संबंध में बच्चों को पूर्व सूचित करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि वर्चुअली कार्यक्रम में सभी बच्चों एवं उनके पालकों को अनिवार्य रुप से जोड़ने हेतु प्रेरित करें। कलेक्टर ने निर्देशित किया है कि बच्चों को तनावमुक्त करने हेतु पालकों से संपर्क कर  घर पर अच्छा माहौल बनाया जाए।  साथ ही सभी पालक अपने बच्चों को रिजल्ट से नही घबराने के लिए प्रोत्साहित करें। किसी भी बच्चे अथवा उसके पालक को कोई भी समस्या है तो वह तत्काल मनोवैज्ञानिकों से और जिला प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। गौरतलब है कि बच्चों के तनावग्रस्त होने के प्रमुख कारणों के संबंध में बच्चों का खुद की महत्वाकांक्षा (एक्सपेक्टेशन), साथियों से तुलना, शिक्षकों द्वारा कक्षा में विद्यार्थियों पर डाले गए दबाव एवं पालको और पड़ोसियों का प्रेशर बच्चों को ज्यादा तनावग्रस्त करता है। इसके लिए ब्लॉक और स्कूल के सभी अधिकारी कर्मचारी एक-एक बच्चों तक पहुंचे और यदि बच्चों में तनाव के कोई भी लक्षण है तो उन्हें दूर करने का प्रयास करें।

By kgnews

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *