छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने परिवार न्यायालय के उस आदेश को बरकरार रखा है जिसमें पति के तलाक की अर्जी को खारिज कर दिया गया। पत्नी ने आरोप लगाया था कि ससुराल में उसे उसकी त्वचा के काले रंग के कारण प्रताडि़त किया जाता था।

बलौदाबाजार जिले के कसडोल के रहने वाले याचिकाकर्ता की 20 अप्रैल 2005 को शादी हुई। कुछ महीने बाद अपनी नौकरी के सिलसिले में पत्नी को लेकर वह हैदराबाद चला गया। बाद में दोनों लौट कर आ गए। पति के मुताबिक इसके बाद पत्नी अपने मायके चली गई और कई बार कोशिश करने के बाद भी वापस नहीं आई। पति ने परिवार न्यायालय में याचिका लगाकर तलाक की मांग की। उसकी ओर से बताया गया कि पत्नी उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर होने का कारण बताकर साथ नहीं रहना चाहती। पत्नी की ओर से जवाब दाखिल किया गया कि इसमें सत्यता नहीं है। पति उसे काले रंग का होने के कारण शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताडि़त करता था। इसके चलते वह एक बार वह आत्महत्या की कोशिश भी कर चुकी है। पति किसी और से शादी करना चाहते हैं, इसलिए उनको तलाक चाहिए।

हाई कोर्ट ने परिवार न्यायालय का फैसला कायम रखते हुए तलाक की अर्जी नामंजूर कर दी। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस दीपक कुमार तिवारी की बेंच ने कहा कि हमें मनुष्य की त्वचा के रंग को प्रोत्साहन नहीं देना चाहिए। हम घर तथा समाज में ऐसा वातावरण बनाएं जिससे लोगों को महसूस हो कि कामयाबी के लिए त्वचा किस रंग का हो यह जरूरी नहीं है।

By kgnews

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