तम्बाखू मुक्त भारत जैसे सरकारी स्लोगन का स्कूल और कालेज के प्रबंधन खिल्ली उड़ाने मजबूर दिखाई दे रहा है। क्योंकि पुलिस प्रशासन और नगरीय निकाय प्रशासन की उदासीनता और अनदेखी के चलते स्कूल प्रबंधन चाह कर भी बच्चों को नशा से मुक्त नहीं कर पा रहा है। प्रदेश में भाजपा की नई सरकार बनने के बाद दबंग शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल से स्कूल और कालेज प्रबंधनों को उम्मीद जगी है कि इस दिशा में शिक्षा मंत्री ठोस कदम उठाएंगे। बृजमोहन की कार्यशैली से सभी परिचित है, वो शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को पूरे देश में अग्रिम पंक्ति में रखने की बात कई बार अपने अधिकृत बयानों में कह चुके है। सरकारी फरमान का आज तक स्कूल और कालेज के प्रबंधन ने गंभीरता से पालन करने का मन ही नहीं बनाया है जिसका खामियाजा पालकों और अभिभावकों को उठाना पड़ रहा है। पालक और अभिभावक तो लाखों रुपए खर्च कर बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल करना चाहते है लेकिन जिस स्कूल -कालेज में बच्चे पढ़ते है वहां तो मार्डन कल्चर का बोलबाला है। जिससे वहां पढऩे वाले बच्चे मोह भंग नहीं कर पा रहे है। क्योंकि कैंपस के सामने और उसके आसपास चल रहे होटल और पान ठेले बच्चों को रिलेक्स के नाम पर धीमा जहर पीला रहे है जिसका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ रहा है। वो नशेड़ी बच्चे स्कूल-कालेज तो जाते है पर पढ़ाई के लिए नहीं बल्कि नशा करने के लिए या दोस्तों के साथ मौज करने के लिए ।
