ग्वालियर
रेल में सफर के दौरान यदि किसी यात्री की तबीयत बिगड़ जाती है तो रेलवे के डाक्टर को फोन करके बुलाना पड़ता है। कई बार समय पर डाक्‍टर न मिलने की वजह से यात्री का इलाज नहीं हो पाता है। इस समस्या से निपटने के लिए रेलवे की ओर से अब रेलवे स्टेशन पर डाक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को चौबीसों घंटे तैनात करने जा रहा है। रेलवे स्टेशन पर चौबीसों घंटे डाक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता से ट्रेन में किसी भी यात्री की तबीयत बिगड़ने पर उसका तत्काल इलाज हो सकेगा।

पुराने सिस्टम के मुताबिक स्टेशन और यात्रा के दौरान ट्रेनों के अंदर यात्रियों की हालत बिगड़ने पर कंट्रोल से सूचना मिलने के बाद रेलवे के एक डाक्टर को इलाज के लिए बुलाया जाता है। नई व्यवस्था को लागू करने के लिए झांसी रेल मंडल शहर में संचालित अस्पताल संचालकों से अनुबंध कर रेलवे यात्रियों को चौबीसों घंटे पैरामेडिकल स्टाफ के साथ-साथ रेलवे यात्रियों को स्टेशन पर उपलब्ध कराएगा। इस सेवा के लिए यात्री को रेलवे को एक निश्चित शुल्क देना होगा। ग्वालियर रेलवे स्टेशन से अप और डाउन ट्रैक से सौ से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं। रोजाना दौड़ती ट्रेनों में सफर के दौरान जब यात्रियों की तबीयत बिगड़ती है तो उन्हें इलाज की जरूरत होती है।

फिलहाल इस रेल सुविधा नंबर 139, रेल सेवा, डीआरएम, जीएम, आरपीएफ और ट्रेन में चल रहे वाणिज्यिक कर्मचारियों या इंटरनेट मीडिया के जरिए फोन कर मदद मांगी जाती है। कंट्रोल से मिले मैसेज पर रेलवे के एक डाक्टर को इलाज के लिए स्टेशन पर बुलाया जाता है। अक्सर ट्रेनों में सफर करने वाले कई यात्रियों की तबीयत बिगड़ जाती है, जिसकी सूचना रेलवे को दी जाती है। ट्रेनों के आने से पहले अगर डाक्टर स्टेशन पर नहीं पहुंचते हैं तो मरीज का इलाज नहीं हो पाता है। ऐसे में बीमार यात्री या तो उसी ट्रेन से अगले स्टेशन के लिए निकल जाते हैं या उन्हें संबंधित स्टेशनों पर उतारकर अस्पतालों में भेजना पड़ता है।

By kgnews

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