महामसुंद, बीआरसी भवन महासमुंद में बुधवार को दिव्यांग बच्चों के पालकों के लिए जिला स्तरीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिपालन में समग्र शिक्षा के अंतर्गत भारत शासन की महत्वाकांक्षी योजना समावेशी शिक्षा के तहत आयोजित किया गया।
एपीसी संपा बोस ने कहा कि समावेशी शिक्षा का उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को बिना किसी भेदभाव के विद्यालयी परिवेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मूल अधिकार है, अतः दिव्यांग बच्चों को संवैधानिक प्रतिबद्धता के तहत समान अवसर मिलना अनिवार्य है।
उन्होंने दिव्यांग बच्चों से व्यवहार की विधियाँ, चिन्हांकन चेकलिस्ट, दिव्यांगता के प्रकार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, निशक्तजन अधिकार अधिनियम 2016, तथा शैक्षिक प्रशासकों और पालकों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए बाधारहित, सुरक्षित एवं अनुकूल शैक्षिक वातावरण तैयार कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है।
एपीसी सुबोध तिवारी ने कहा कि पालकों एवं समाज को दिव्यांगजनों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए। दिव्यांगता विकास में बाधा नहीं है, बल्कि ऐसे बच्चों में विशेष प्रतिभाएं होती हैं। आज अनेक दिव्यांगजन विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट पदों पर कार्यरत हैं। इस मौके पर जागेश्वर सिन्हा, रेणु चन्द्राकर, अनीता निर्मलकर, प्रवीण सोनकुंवर, केशव साहू एवं भुनेश्वर साहू का सराहनीय योगदान रहा।
आवश्यकता आधारित शिक्षा पर चर्चा की गई मास्टर ट्रेनर बीआरपी रंभा जायसवाल और स्पेशल एजुकेटर तुलसी साहू ने शासन से मान्यता प्राप्त 21 प्रकार की दिव्यांगताओं जैसे पूर्ण दृष्टिहीनता, अल्प दृष्टिबाधित, श्रवण एवं मूक बाधित, प्रमस्तिष्कीय पक्षाघात, स्वलीनता, थैलेसीमिया, हीमोफीलिया, अस्थिबाधित, सिकल सेल, मानसिक बीमारी, बहु विकलांगता की विस्तार से जानकारी दी। साथ ही आवश्यकता आधारित शैक्षिक सुविधाओं पर चर्चा की गई।
