राजनांदगांव, 13 वर्षीय बाल मुनि हंसभद्र ने अपनी असाधारण मेमोरी से सभी को चकित कर दिया। रविवार को छत्तीसगढ़ के जैन बगीचा में आयोजित चातुर्मास के दौरान हुए शतावधान प्रयोग में बाल मुनि ने अपनी याददाश्त और बुद्धिमत्ता का ऐसा उदाहरण पेश किया कि सभी दर्शक हैरान रह गए।
इस कार्यक्रम में शहर के विभिन्न समाजों के लोगों ने 1 से 100 तक के नंबरों के बारे में पूछा और बाल मुनि ने बिना किसी डिप्ले बोर्ड को देखे केवल सवाल सुनकर ही सभी का सही.सही जवाब दिया। उन्होंने नंबर 69, 55, 60, 12 और 67 के बारे में बिना देखे ही जवाब दिया जैसे 69 में कुशल सूरी 55 में अयोध्या 66 में सिलियारी 12 में ओघा और 67 में विराग मुनि नाम लिखा था।
छत्तीसगढ़ में पहली बार शतावधान प्रयोग आयोजित किया गया जिसमें 100 अलग.अलग टोकन लोगों को दिए गए थे। इन टोकन के माध्यम से लोग बाल मुनि से विभिन्न विषयों पर सवाल पूछ रहे थे जैसे महापुरुषों तीर्थ स्थलों उपकरणों जानवरों या पक्षियों के नाम। हर सवाल का बाल मुनि ने तुरंत सही जवाब दिया चाहे वह किसी भी क्रम में पूछा गया हो। उनकी इस अद्भुत मेमोरी को देख लोग हैरान थे और उन्हें दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर हो गए।
लोगों के आश्चर्यचकित चेहरे रू. इस कार्यक्रम में सकल जैन श्री संघ के अध्यक्ष मनोज बैद और चातुर्मास समिति के संयोजक प्रदीप गोलछा प्रभात कुमार रितेश लोढ़ा दीनानाथ लोढ़ा आकाश चोपड़ा और अन्य समाज के लोग उपस्थित थे। इन सभी ने बाल मुनि की असाधारण स्मरण शक्ति की सराहना की।
इस साधना को शतावधान कहा जाता है जिसमें 100 अलग.अलग शब्दों या वस्तुओं को याद करना और फिर उन शब्दों के बारे में सवालों का जवाब देना होता है। यह एक मानसिक अभ्यास है जिसे प्राचीन समय में ऋ षि.मुनि अपनी याददाश्त को मजबूत करने के लिए करते थे। बाल मुनि हंसभद्र ने इसे पूरी दक्षता के साथ किया और लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
शतावधान प्रयोग का महत्व रू. इस कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि मानसिक अभ्यास और सही मार्गदर्शन से कोई भी असाधारण कौशल हासिल किया जा सकता है। बाल मुनि हंसभद्र ने यह दिखाया कि चाहे आप किसी भी उम्र के हों अगर आपके पास सही ज्ञान और साधना हो तो आप अपनी मेमोरी और बुद्धिमत्ता को अपार ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।
