अंबागढ़ चौकी, नक्सलवाद के साये में वर्षों तक डर और असुरक्षा में जी रहे नक्सल पीड़ित परिवारों के लिए अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। जिले में शासन की पुनर्वास नीति और पुलिस-सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से नक्सली गतिविधियों में कमी आई है, जिसका सीधा लाभ अब प्रभावित परिवारों को मिल रहा है।
एक समय था जब जिले के कई अति संवेदनशील गांव रामगढ़, कंदाढ़ी, औंधी, बसेली, ढब्बा, गढ़डोमी, हलोरा, जक्के, कोतरी और सरखेड़ा में नक्सलियों की दहशत के चलते इनमे स्व कई परिवारों को अपना घर-गांव छोड़ना पड़ा था। पुलिस मुखबिर होने के शक में नक्सलियों द्वारा परिवार के मुखिया की हत्या कर दी जाती थी, जिसके बाद पूरे परिवार को जान बचाकर पलायन करना पड़ता था। जिले में कुल 84 नक्सल पीड़ित परिवार चिह्नांकित किए गए हैं। इनमें से 26 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान स्वीकृत किए गए हैं।
शासन से आवास मिलने के बाद ये परिवार दोबारा अपने गांव लौटकर सामान्य जीवन की शुरुआत कर रहे हैं। मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रांजल प्रजापति ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नक्सल पीड़ित परिवारों के 26 आवास स्वीकृत किए गए हैं और इन्हें शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं।
नक्सल पीड़ित राम बाई मंडावी ने बताया कि वर्ष 2009 में उनके पति की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी, जिसके बाद पूरा परिवार गांव छोड़कर चला गया था। अब नक्सली गतिविधियां कम होने पर वे वापस लौटे हैं और शासन से मिले आवास में रहने का निर्णय लिया है। इसी तरह अघन सिंह ने बताया कि उनके पिता को नक्सलियों ने पुलिस मुखबिर समझकर मार डाला था। उस समय किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला, लेकिन अब कई वर्षों बाद उन्हें पक्का मकान मिला है। नक्सल पीड़िता रमिता बाई ने बताया कि नक्सलियों ने उन्हें बंधक बनाकर रखा था। भय के कारण वे लगभग 18 वर्षों तक मानपुर में रहीं। अब हालात सुधरने पर उन्हें आवास मिला है और वे अपने गांव में बस रही हैं।
