राजनांदगांव, संस्कृत भारती राजनांदगांव के तत्वावधान में विगत दिनों नीरज पैरेंट्स प्राइड विद्यालय बल्देव बाग में गीता जयंती का भव्य कार्यक्रम हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नीरज बाजपेयी ने कहा कि गीता जीवन का सार है, जिस व्यक्ति को इस गीता रूपी गुटखे की लत लग गई उसका मनुष्य जीवन लेना सार्थक है।
कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. चन्द्रशेखर शर्मा ने कहा कि जीवन जीने की भव्यतम- दिव्यतम कल्पना का साकार रूप श्रीमद्भगवद्गीता है। जीवन का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जिसे गीता ने स्पर्श न किया हो। जीवन की ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका समाधान गीता से ना प्राप्त किया जा सके। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि कौशल वर्मा ने बताया कि गीता मनुष्य को धर्म के मार्ग पर चलने और बिना फल की चिंता किए सही कर्म करने की शिक्षा देती है। मुख्यवक्ता डॉ. शंकरमुनि राय ने कहा कि गीता में ज्ञानयोग, कर्मयोग और भक्तियोग जैसे मार्गों के बारे में बताया गया है, जो मन को नियंत्रित करके वैराग्य और आंतरिक ज्ञान से सच्ची शान्ति प्राप्त की जा सकती है।
कार्यक्रम की संयोजिका एवं इस अवसर पर संस्कृत भारती की जिला मंत्री डॉ. आकांक्षा विश्वकर्मा, प्रान्त शिक्षण प्रमुख नरेंद्र साहू मौजूद थे।
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