ग्वालियर
 सीबीआइ के विशेष सत्र न्यायालय ने सोमवार को पीएमटी कांड के छह आरोपितों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। साथ ही 3700 रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने आरोपितों को सजा काटने के लिए जेल भेज दिया है। जिन्हें सजा सुनाई गई है, उनमें साल्वर, छात्र व दलाल शामिल हैं।

व्यापमं(व्यावसायिक परीक्षा मंडल) ने प्रदेश में 20 जून 2010 को प्री मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) का आयोजन किया था। पीएमटी का गुना के पीजी कालेज में भी सेंटर था। इस सेंटर पर अवधेश कुमार की जगह प्रदीप उपाध्याय और राजेश बघेल की जगह परवेज आलम पेपर देने आए थे। परीक्षा हाल में वीक्षक को परीक्षार्थियों के चेहरे फार्म पर लगे फोटो से मैच नहीं होने पर इन दोनों पर शक हुआ। उनसे पूछताछ की गई तो बताया कि दोनों साल्वर के रूप में परीक्षा देने आए हैं। केंद्राध्यक्ष ने दोनों को पुलिस के सुपुर्द कर दिया।

दोनों आरोपितों ने पुलिस को बताया कि उन्हें हरिनारायण सिंह व वेदरतन लेकर आए हैं। इसके बदले में उन्हें पैसा मिला है। उन्हें गुना तक लाने के लिए चारपहिया वाहन किराये पर दिया गया था। पुलिस ने अवधेश कुमार से 80 हजार व परवेज से 60 हजार रुपये बरामद किए। इनके पास एटीएम कार्ड भी था। इसके बाद पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह केस सीबीआइ को स्थानांतरित हो गया। 2017 से सीबीआइ ने इस केस की ट्रायल पूरी कराई।

आरोपितों ने बचाव में तर्क दिया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। ऐसे कोई तथ्य नहीं हैं, जिससे उन्हें दोषी ठहराया जा सके। वह नवयुवक है। यदि कोर्ट सजा देता है तो उनके भविष्य पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। इसलिए सजा देने में नरमी बरती जाए। अभियोजन ने कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की। आरोपित ने एक मेधावी विद्यार्थी का हक खत्म किया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद छह आरोपितों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। सीबीआइ की ओर से लोक अभियोजक चंद्रपाल ने पैरवी की।

By kgnews

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