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अर्थ के अभाव से जूझने वाली जयपाली के घर की अर्थव्यवस्था ही बदल गई

भोपाल कोई भी जरिया न हो, तो दो घड़ी रूकते हैं……. क्युंकि हौसलों के आगे, तो पर्वत भी झुकते हैं…. जीवन की दुश्वारियां कभी-कभी निराश कर देती हैं। निराश मन…