राजनांदगांव , संस्कारधानी में शिक्षा, संस्कृति, संस्कार के लिए 44वें वर्ष में संस्था ने युवा और बच्चों में सनातन गुरु-शिष्य प्राच्य भारतीय ज्ञान परंपरा का बीज रोपने का संकल्प दोहराया। अर्पण नृत्य समागम मंदिर परंपरा से जुड़ा आयोजन है। प्राचीन ग्रंथों में साहित्यकार, संगीतकार, नृत्यकार के अपने सृजन की पहली प्रस्तुति देवी-देवताओं के सामने भक्ति भाव से अर्पण करने का विधान मिलता है। इसी परंपरा को चक्रधर कथक कल्याण केन्द्र के संस्थापक नृत्याचार्य कृष्ण कुमार सिन्हा पिछले 35 वर्षों से अर्पण नृत्य समागम के जरिए शीतला माता के चरणों में शिष्यों के साथ निभाते आ रहे हैं।
कार्यक्रम में नगर की कुल देवी शीतला माता की पूजा-अर्चना हुई। पीयूष महाराज ने कथक अर्पण करने वाले युवा और बाल कलाकारों का घुंघरू पूजन संस्कार कराया। पहली प्रस्तुति में बाल कलाकार वेद तुषार सिन्हा ने स्वतंत्र तबला वादन किया। ताल त्रिताल में कायदा, तोड़े, टुकड़े, तिहाई पेश की। इसके बाद बिरजू महाराज की रचना भजन ‘रास रचत बृज में’ पर छोटे बच्चों ने नंदलाला, राधा-रानी, कृष्ण और गोपियों के साथ मधुर भाव नृत्य किया।
दर्शकों ने खूब सराहा। भागीरथ द्वारा गंगा को पृथ्वी पर लाकर पूर्वजों का तर्पण करने के दृश्य की सजीव प्रस्तुति प्रियलराज, प्रसिद्धि सिन्हा, मनस्वी भट्टड़, हर्षिता गोसाई, शिवांशी श्रीवास्तव, परी महेन्द्रा, चाहत टांक, अनिका गजमिये ने दी। विन्दादीन महाराज की ठुमरी ‘श्याम छवि अति बनी’ पर कृष्ण के विभिन्न रूपों की प्रस्तुति रही। बनारस की मशाने की होली ‘खेले मशाने की होली’ को भी कथक के जरिए मंच पर उतारा गया। इसे आत्मा के परमात्मा से मिलने की कथा के रूप में दिखाया गया। अंत में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेल गीत ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। कार्यक्रम का संचालन पद्मलोचन शर्मा ने किया।
सहयोगी मंच संचालक थंगेश्वर कुमार साहू रहे। आयोजन में पालक और गणमान्य नागरिक राकेश इन्द्र भूषण ठाकुर, अमलेन्द्र हाजरा, आजू राम सिन्हा, सुयश सूर्यकांत ठाकुर, विजय भट्टड़, कुलदीप गजमिये, राजेश सोनी, पुजारीगण का विशेष सहयोग रहा।
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