राजनांदगांव : आवासीय शिविर में बच्चों को दी गई संस्कार की शिक्षा…
राजनांदगांव , जैन बगीचा में आयोजित बोहिलाभम् आवासीय संस्कार शिविर खरतर गच्छाचार्य संयम सारथी जिन पीयूष सागर सुरिश्वर जी की निश्रा में संपन्न हुआ। शिविर में छत्तीसगढ़ क्षेत्र के अलावा बाड़मेर, जोधपुर, अमरावती, वणि, चेन्नई, खरियार रोड, बालाघाट, गोंदिया आदि से लगभग 162 बच्चों ने हिस्सा लेकर ज्ञान, ध्यान, संस्कार व व्यक्तित्व निर्माण की विविध गतिविधियों का लाभ लिया।
शिविर के समापन के अवसर पर जैन आचार्य सम्यक रत्न सागर जी ने कहा कि परिवर्तन दो प्रकार के होते हैं। पहला भौतिक परिवर्तन जिसमें पानी बर्फ और वाष्प का रूप धारण कर पुनः पानी का रूप धारण कर लेता है अर्थात पानी अपने मूल रूप में ही रहता है। यह परिवर्तन क्षणिक होता है। दूसरा परिवर्तन है रासायनिक परिवर्तन जिसमें दूध दही और घी का रूप धारण करने के बाद फिर से दूध नहीं बन सकता। यह परिवर्तन स्थाई परिवर्तन होता है। शिविर में आए बच्चों ने संस्कार की शिक्षा ली है और यह स्थाई परिवर्तन है जो उनमें जड़ कर गया है। संस्कारों का यह परिवर्तन अब उनके साथ ही रहेगा।
जीवन में अहंकार और अभिमान को स्थान ना दें शाश्वत रत्न सागर जी ने कहा कि बचपन से हमें बचपन से करेंसी कमाने और करियर बनाने की शिक्षा दी जाती है किंतु करैक्टर बनाने की शिक्षा कहीं नहीं दी जाती। कहा कि संस्कार शिविरों में ही करैक्टर बनाने की शिक्षा दी जाती है। इसलिए ऐसे शिविरों से फायदा उठाएं और अपने बच्चों का करैक्टर निर्माण करें। शिविर में बच्चों ने अपने-अपने अनुभव सुनाए। शिविर के संयोजक भावेश बैद ने कहा कि आवासीय संस्कार शिविर का आयोजन हुआ। संघ के सभी सदस्यों ने मिलकर अच्छा काम किया और शिविर को सफलता के मुकाम में पहुंचाया।
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