गायत्री शक्तिपीठ में श्रीमद् देवी भागवत कथा सुनने उमड़ी भीड़
राजनांदगांव 1 अप्रैल। शास्त्री ईश्वर चंद जी व्यास ने आज गायत्री शक्तिपीठ में माहेश्वरी समाज द्वारा आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा के तीसरे दिन कहा कि श्लोक के बिना हृदय आलोक नहीं होता। श्लोक सुनने से भी जप होता है। उन्होंने कहा कि जो कोई जप रहा है उसका श्रवण करें उसे ध्यान से सुन तो लाभ अवश्य मिलेगा। श्लोक सुनने से सेल्स रिचार्ज हो जाते हैं और शरीर में ऊर्जा भर जाती है।
गायत्री मंदिर में चल रही श्रीमद् देवी भागवत कथा के तीसरे दिन शास्त्री जी के श्रीमुख से कथा को सुनने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी।शास्त्री जी ने कथा सुनाते हुए कहा कि मां की महिमा अनंत है। भगवती की स्तुति अवश्य करनी चाहिए। हम भगवान की स्तुति इसलिए करते हैं क्योंकि उन्होंने हमें सब कुछ दिया, भगवान की स्तुति इसलिए भी की जाती है कि भगवान को बिल्कुल भी अभिमान नहीं होता और सभी के लिए वह समान है।
शास्त्री ईश्वर चंद्र जी व्यास ने कहा कि जैसा पुजारी होता है वैसा ही देव होता है क्योंकि पूजा करने वाले की भावना उसमें जुड़ती है और भगवान वैसा ही रूप धारण कर लेता है। मां की महिमा को पाने के लिए उनकी स्तुति करनी पड़ती है। मां में कोई भेद नहीं होता और जिसे भेद दिखता है वह उसका दृष्टि भ्रम होता है, वह उसका मति भ्रम होता है। मां संसार में होते हुए भी विमुक्त होती है। श्रद्धा ,मेघा ,दया ,कृपा, लज्जा, स्त्री, पुरुष, शक्ति ,शक्तिमान सब मां के ही रूप है। प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर श्लोक में भाव होते हैं। चंद्र में शीतलता मां है तो सूर्य में तेज भी मां है। शिव में शक्ति समाहित ना हो तो शिव नजर ही नहीं आएगा। शिव निर्गुण है, निराकार है।
4 अप्रैल को अन्नकूट एवं 56 भोग का आयोजन
आयोजन समिति माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष पवन डागा ने बताया कि कल 2 अप्रैल को देवी के चरित्र का वर्णन व्यास जी द्वारा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 4 अप्रैल को अन्नकूट एवं 56 भोग का आयोजन किया गया है। उन्होंने धर्म प्रेमी भाइयों एवं बहनों तथा माताओं से अधिक से अधिक संख्या में इस अवसर पर उपस्थित होकर कथा श्रवण करने तथा पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है। बिलासपुर. सरकारी तंत्र की लापरवाही का मामला सामने आया है. जीवित व्यक्ति को सरकारी रिकार्ड…
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