महापौर ने दोपहर बाद अचानक बैठक बुलाई, सभी पार्षद नहीं पहुंचे, इधर भाजपा पार्षदों ने जीत का जश्न मनाया प्रदेश में सरकार बदलते ही नगर निगम में अविश्वास प्रस्ताव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। भाजपा पार्षद दल ने पहले ही अविश्वास प्रस्ताव लाने कलेक्टर को ज्ञापन दिया था। संभव है कि आगे इस मुद्दे पर भाजपा पार्षद दल फिर प्रशासन पर दबाव बना सकता है। इधर सोमवार को कामकाज शुरू होते ही भाजपा पार्षद पहुंचे। निगम परिसर में ही प्रदेश में भाजपा की जीत का जश्न मनाया। जमकर पटाखे भी फूटे। इसके बाद महापौर हेमा देशमुख ने आनन-फानन में कांग्रेस पार्षदों की बैठक बुलाई। जिसमें महज 15 पार्षद ही पहुंचे। बैठक में मौजूद कुछ पार्षदों ने भास्कर को बताया कि इसमें किसी विशेष मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई। बल्कि सभी पार्षदों को एकजुट रहने की नसीहत दी गई है। किसी भी पार्षद को सत्ता के दबाव या किसी तरह के लालच में पाला नहीं बदलने की बात कही गई है। वहीं भाजपा पार्षद दल द्वारा किए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर भी चर्चा की गई है। बैठक में पूरी तरह नगर निगम में कांग्रेस की सत्ता को बचाए रखने पर चर्चा की गई। कई पार्षद मौजूद नहीं थे। संख्या बल के लिहाज से पूरी तरह मजबूत है कांग्रेस निगम में कुल 51 वार्ड हैं। जिसमें 31 पार्षद कांग्रेस और 19 भाजपा के हैं। जबकि एक पार्षद अन्य दल से है। जिसने महापौर चुनाव के वक्त कांग्रेस को भी समर्थन दिया था। अविश्वास प्रस्ताव को पास करने के लिए करीब 37 पार्षदों की जरूरत होगी। जो इस वक्त संभव नहीं दिख रहा है। लेकिन कई कांग्रेस पार्षदों में मन-मुटाव की स्थिति अंदरखाने बनी हुई है। 31 पार्षद होने के बाद भी बैठक में महज 15 कांग्रेस पार्षद ही पहुंचे। यह भी चिंताजनक स्थिति है। इससे कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। हार की समीक्षा नहीं, अटके काम पूरा करने पर फोकस कांग्रेस पार्षदों की बैठक में नगर निगम क्षेत्र में कांग्रेस को मिली हार पर किसी तरह की चर्चा नहीं हुई। संभावना थी कि इस पर समीक्षा की जाएगी। लेकिन इस बिंदु को दरकिनार रखा गया। वहीं पार्षद निधि की राशि के खर्च और शहर में शेष बचे निर्माण कार्यो में तेजी लाने पर जरुरी बात हुई है। सड़कों की मरम्मत सहित अन्य कार्यो को निर्धारित समय पर पूरा करने को लेकर बैठक में चर्चा हुई है। बता दें कि मूलभूत कार्यो में लेटलतीफी को लेकर पूर्व में भी कुछ पार्षदों ने प्रशासन के सामने नाराजगी जाहिर की थी।
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