केंद्र सरकार ने बजट में देश भर में 750 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय खोलने के लिए प्रावधान किया है। ऐसे में छत्तीसगढ़ के पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र के वंचित 14 विकासखडों में भी आवासीय विद्यालय खोलने का रास्ता साफ हो गया है। जानकारों की मानें तो यदि ये स्कूल प्रदेश में खुले तो न सिर्फ शिक्षकों की नियुक्ति से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि प्रदेश में इस विद्यालय के खुलने के बाद आदिवासी बच्चों को 5,600 और सीटों पर दाखिल होने का अवसर मिल सकेगा। अभी तक प्रदेश में 16 हजार छात्र-छात्राएं एकलव्य विद्यालय में अध्ययनरत हैं। बता दें कि छत्तीसगढ़ में 85 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति बहुल वाले विकासखंड हैं। जिन विकासखंडों में 50 फीसद से अधिक आबादी आदिवासियों की होती है, वहां पर एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय खोले जाते हैं। प्रदेश में कुल 85 विकासखंडों में से 14 विकासखंड ऐसे हैं, जहां अभी तक एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय नहीं हैं। ऐसे में केंद्र सरकार के इस बजट से इन विकासखंडों में भी उम्मीद है कि विद्यालय खुलेंगे। प्रति विद्यालय के सेटअप के लिए केंद्र सरकार ने इन विद्यालयों की इकाई लागत भी बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये से 38 करोड़ रुपये कर दी है। वहीं पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में यह बजट 48 करोड़ रुपये रखा गया है।
प्रदेश में अभी चल रहे हैं कि 71 विद्यालय
प्रदेश में आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग की ओर से अभी 71 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित हैं। प्रति एकलव्य विद्यालय में कुल 60 सीटे हैं, जिनमें से बालक 30 व बालिका के 30 सीटें संचालित हैं। कक्षा छठवीं से 12वीं तक आदिवासी बच्चों को दाखिल होने का अवसर मिलता है।
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