राजनांदगांव , छुरिया विकासखंड का छोटा सा ग्राम घुपसाल अब बड़ी सोच के कारण पूरे जिले के लिए उदाहरण बन गया है। जहां कभी मार्च के बाद तालाब सूख जाते थे और हैंडपंप जवाब दे देते थे, वहीं इस साल गर्मियों में भी गांव में पानी भरपूर है। इसकी वजह है किसानों का एकजुट होकर लिया गया बड़ा फैसला- धान जैसी ज्यादा पानी वाली फसल छोड़कर कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की ओर रुख करना।
गांव के किसानों ने रबी सीजन में करीब 350 एकड़ से ज्यादा रकबे में मक्का, दलहन और तिलहन की खेती की। इसका असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे गांव के जलस्तर पर दिखाई दिया। पहले जहां फागुन के बाद ही जलस्रोत सूखने लगते थे, इस बार अप्रैल के आखिर तक भी तालाब और नालों में पानी बना हुआ है। यह बदलाव किसी योजना या दबाव से नहीं, बल्कि किसानों के सामूहिक निर्णय से आया। जल संकट को समझते हुए गांव ने खुद अपनी खेती की दिशा बदली और अब उसका फायदा पूरे समाज को मिल रहा है।
कलेक्टर ने खेत में उतरकर देखा मॉडल कलेक्टर जितेन्द्र यादव खुद गांव पहुंचे और खेतों में जाकर फसलों की स्थिति देखी। किसानों से चर्चा के दौरान उन्होंने माना कि कम पानी में ज्यादा उत्पादन देने वाली खेती ही भविष्य है। घुपसाल का मॉडल जल संरक्षण के साथ आय बढ़ाने का बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने इसे अन्य गांवों में लागू करने की बात कही। इस बदलाव से सिंचाई पर खर्च कम हुआ है और फसल भी बेहतर मिल रही है। यानी एक ही फैसले से पानी की बचत के साथ आर्थिक फायदा भी मिल रहा है।









