एम्स में योग के प्रशिक्षण, अध्यापन पर जल्द शोध शुरू होगा। इसके लिए हाल ही में एम्स रायपुर और सेंट्रल काउंसिल फार रिसर्च इन योगा एंड नेचुरोपैथी के मध्य सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया गया है। इसके तहत एम्स में माइंड-बाडी मेडिसिन रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा।
इस सेंटर में कैंसर, स्ट्रोक, मधुमेह, मोटापा, मानसिक समस्या और अन्य आधुनिक दिनचर्या संबंधी बीमारियों पर शोध कर उनका आयुष के माध्यम से इलाज ढूंढा जाएगा। सेंटर योग पर शोध का महत्वपूर्ण केंद्र भी बन सकेगा, जहां चिकित्सकों, छात्रों और योग आचार्यों को नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
निदेशक डाक्टर नितिन एम नागरकर और सीसीआरवाइएन के निदेशक डाक्टर राघवेंद्र राव ने आनलाइन माध्यम से एमओयू पर हस्ताक्षर किया है। उन्होंने बताया कि कहा कि सेंटर के माध्यम से विभिन्न संस्थानों के पास उपलब्ध क्लिनिकल डेटा का उपयोग आयुष संबंधी शोध में संभव हो सकेगा, जिससे नान कम्युनिकेबल डिजिज के इलाज में आयुष का प्रभावी प्रयोग किया जा सकेगा।
एलोपैथी और आयुष से मिलकर बेहतर इलाज
एम्स के डायरेक्टर डाक्टर नागरकर ने कहा कि आयुष की स्थापना के बाद से बड़ी संख्या में शोध संबंधी आंकड़े एकत्रित किए गए हैं। नया सेंटर इस डेटा को आवश्यक चिकित्सा प्रणाली में बदलने में उपयोगी सिद्ध हो सकता है। विभिन्न क्लिनिकल विभाग रोगियों का अत्याधिक भार महसूस कर रहे हैं। ऐसे में आयुष इस भार को कम करने में उपयोगी सिद्ध हो सकता है। एलोपैथी और आयुष मिलकर रोगियों के इलाज में उपयोगी हो सकते हैं।
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