राजनांदगांव , अमृत भारत स्टेशन योजना राजनांदगांव रेलवे स्टेशन में पिछड़ती जा रही है। स्टेशन का काम डेढ़ साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन तीन साल बाद भी ज्यादातर काम अधूरे पड़े हैं। निर्माण की कमजोर गति की वजह से यात्री सुविधा के ज्यादातर काम अधूरे हैं।
17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागपुर मंडल में नैनपुर, बालाघाट, छिंदवाड़ा रेलवे स्टेशन का वर्चुअल शुभारंभ किया। इन्हीं स्टेशनों के साथ राजनांदगांव के रिनोवेशन कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया थ। लेकिन काम पिछड़ने की वजह से स्टेशन को वर्चुअल उद्घाटन में शामिल नहीं किया जा सका। लगभग एक साथ काम शुरू होने के बाद डोंगरगढ़ के रेलवे स्टेशन का सालभर पहले पूरा किया जा चुका है।
लेकिन नांदगांव स्टेशन में अब भी रोड, नाली, भवन, बिजली, टीन शेड, सौंदर्यीकरण, यात्री सुविधा से जुड़े काम बाकी है। 14 करोड़ की लागत से राजनांदगांव रेलवे स्टेशन का रिनोवेशन किया जाना है। वर्तमान में प्लेटफार्म में एस्कलेटर लगाने गड्ढे खोदे फेसिंग की गई, जगह कम होने से यात्रियों को परेशानी हो रही है।
यहां यात्रियों को बेहतर सुविधा देने का दावा फेल राजनांदगांव रेलवे स्टेशन को आकर्षक बनाने बेहतर प्रवेश और निकास व्यवस्था, दिव्यांगजन-अनुकूल सुविधा सहित सौंदर्यीकरण, प्रकाश व्यवस्था के कुछ काम हुए। लेकिन प्रतीक्षालय, डिजिटल यात्री सूचना प्रणाली, शौचालय, सौंदर्यीकरण संबधित कई काम बाकी है। विकास कार्यों का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, विश्वस्तरीय यात्रा अनुभव कराना था। दावा फेल साबित हुआ। यहां यात्रियों के सारी सुविधाओं के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।
निरीक्षण कर काम में तेजी लाने के लिए कहा नागपुर मंडल के पीआरओ फैज खान अशरफी का कहना है हालही में अफसरों ने निरीक्षण कर काम में तेजी लाने कहा है ऐसी जानकारी मिली है। इस योजना के तहत लगभग काम पूरा हो गया है। जल्द ही विधिवत शुभारंभ किया जाएगा। इधर स्टेशन प्रबंधक आरके बर्मन का कहना है रेलवे के निर्माण शाखा के अफसर इसकी जानकारी दे पाएंगे।
लगातार पिछड़ते जा रहा काम, मॉनिटरिंग कमजोर एस्कलेटर का काम जारी है, रोड, नाली, भवन, बिजली, टीन शेड, सौंदर्यीकरण और यात्री सुविधा से जुड़े काम तीन सालों में पूरे नहीं हो सके। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत राजनांदगांव रेलवे स्टेशन में वेटिंग हॉल, एस्कलेटर, लिफ्ट, दिव्यांग के लिए सुविधा, बच्चों के मनोरंजन का इंतजाम, कैफै, कैंटिन सुविधा का दावा किया गया था। अफसर व ठेकेदार मटेरियल और मशीनरी तो कभी लेबर संकट के अलावा निर्माण में बार-बार बदलाव को काम पिछडऩे का सबसे प्रमुख कारण बताते आ रहे हैं।
गुणवत्ताहीन काम होने से बदलाव भी किया गया रेलवे के बड़े अफसरों ने निरीक्षण कर निर्माण की गुणवत्ता पर अफसरों और ठेकेदारों को फटकार लगाई। गुणवत्ताहीन काम होने की वजह से बदलाव किया गया, नई योजना शामिल हुई, गुणवत्ता में सुधार के साथ नक्शे, डिजाइन में बदलाव किया गया है। वर्तमान में स्टेशन पारा की तरफ का काम पूरा हो गया लेकिन शहर की तरफ बाकी है। चौथे प्लेट फार्म, चौथी लाइन का काम धीमा है। वर्तमान में एस्कलेटर के लिए फाउंडेशन का काम चल रहा। बिजली और वायरिंग का काम करना बाकी है।
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