छत्तीसगढ़

राजनांदगांव : जूझते रहे प्रगणक… न किट मिला, न शहरी क्षेत्र में एप शुरू हुआ, मकान ढूंढने में भी हुई परेशानी …

राजनांदगांव l 16 साल बाद जनगणना की शुरुआत शुक्रवार से हुई, लेकिन पहले ही दिन जनगणना अव्यवस्था की भेंट चढ़ गई। प्रगणक अपने ड्यूटी क्षेत्र में मकान संख्या ढूंढते भटकते रहे। वहीं कई प्रगणकों की आईडी ही एप में लॉगिन नहीं हो सकी। जिसकी वजह से ज्यादातर हिस्सों में जनगणना का काम पहले दिन ठप रहा। निगम क्षेत्र में कई सुपरवाइजर एप ही चालू नहीं कर पाए। उन्हें पासवर्ड ही नहीं दिया गया था। किट भी नहीं मिला।

दरअसल नगर निगम व तहसील क्षेत्र में प्रगणकों को जिओ टैग सैटेलाइट नक्शा उपलब्ध कराया गया है। प्रगणकों ने बताया कि नक्शे में कुछ भी स्पष्ट समझ नहीं आ रहा है। कौन सा मकान नंबर है, मकान कहां मौजूद है। यह ढूंढने में उन्हें काफी समस्या हो रही है। नक्शा भी साफ नहीं है, जिसके चलते मकानों को ढूंढना नई चुनौती बन गई है। घनी बसावट वाले वार्डों में ऐसी समस्या और गंभीर हो गई। जहां नक्शे के आधार पर मकानों तक पहुंचने में समस्या होती रही। ज्यादातर प्रगणकों ने पहले ही दिन काम बंद कर दिया या एक से दो घरों में ही जनगणना की यही समस्या जनगणना के लिए बनाए गए एप्लीकेशन में भी हुई। आईडी पासवर्ड डालने के बाद भी एप लॉगिन नहीं हुआ।

जनगणना के लिए बांटी गई ड्यूटी चार्ट में भी समन्वय की भारी कमी देखने को​ मिल रही है। अलग-अलग ब्लाक में तैनात प्रगणकों की मा​निटरिंग या समस्या के लिए सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। लेकिन ज्यादातर प्रगणकों को अपने सुपरवाइजर के लिए बारे में जानकारी ही नहीं है। वहीं सुपरवाइजर का मोबाइल नंबर भी प्रगणकों को उपलब्ध नहीं कराया गया है। जिसकी वजह से समस्या और बड़ी हो गई है।

^फिलहाल दिल्ली बाई-पोस्ट किट आ रही है, यह 6 या 7 मई तक बंटेगी। एप का पासवर्ड मैसेज में सुपरवाइजरों को आया होगा। एक साथ सबकी ट्रेनिंग हुई है। कई लोगों की ड्यूटी लास्ट में लगी है, क्योंकि कुछ मेडिकल रीजन से नाम कटे हैं। नए लोगों की ड्यूटी जिनकी लगी है, उन्हें निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही यह प्रक्रिया गति पकड़ेगी। – अनिकेत साहू, नोडल अफसर

जनगणना का पहला दिन सिर्फ औपचारिक की साबित हुआ। कुछ ही प्रगणक ऐसे थे, जिन्होंने 8 से 10 घरों में गणना पूरी की। सैटेलाइट नक्शे में की वजह से हो रही दिक्कत, एप लॉगिन की समस्या ने प्रगणकों को पूरे दिन उलझाए रखा। अलग-अलग ब्लाक के प्रगणकों ने इन समस्याओं को दूर करने की मांग प्रशासन से की है। ट्रेनिंग के दौरान जिस मॉडल एप से प्रशिक्षण दिया गया उसमें और जनगणना के वास्तविक एप में अंतर होने से भी प्रगणक परेशान हो रहे हैं।पहले दिन काम की औपचा​िरकता भर रह गई।

ग्रामीण इलाकों में नक्शे और भवन क्रमांक के साथ संबंधित व्यक्ति का नाम भी प्रगणकों को दिया गया है। लेकिन जब प्रगणक वहां पहुंच रहे हैं, तो उन्हें न व्यक्ति मिल रहा है, न उक्त भवन क्रमांक। ऐसी स्थिति में प्रगणकों के सामने समस्या और बड़ी हो गई है। गंभीर बात यह है कि इन समस्याओं की शिकायत को सुनने के लिए पहले दिन कोई भी हेल्प डेस्क या टीम मौजूद नहीं रही।

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