राजनांदगांव। नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल (ऑयल पाम) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन एवं ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य एवं बदलते कृषि परिदृश्य, घटते भू-जल स्तर एवं सीमित लाभ को देखते हुए अब धान फसल के विकल्प के रूप में आयल पॉम की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत जिले के 70 कृषकों एवं विभागीय अधिकारियों का महासमुंद जिले के ग्राम भलेसर में एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण व प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। शैक्षणिक भ्रमण व प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कृषकों को ऑयल पाम की खेती से संबंधित भूमि का चयन, पौध रोपण दूरी (939 मीटर), सिंचाई प्रबंधन, खाद-उर्वरक प्रबंधन, रोग-कीट नियंत्रण एवं योजना अंतर्गत उपलब्ध अनुदान एवं अन्य तकनीकी जानकारी प्रदान की गई।
सहायक संचालक उद्यान ने बताया कि ऑयल पाम एक बहुवर्षीय फसल है, जिसकी आर्थिक आयु 25 से 30 वर्ष होती है तथा 4 से 5 वर्ष में उत्पादन प्रारंभ हो जाता है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषकों को तिलहन फसलों की खेती के लिए प्रेरित कर खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाना एवं कृषकों की आय में वृद्धि करना है। उन्होंने बताया कि ग्राम भलेसर के प्रगतिशील कृषकों ने ऑयल पाम फसल के संबंध में अपने अनुभव साझा किया। भ्रमण व प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल जिले के कृषक अत्यंत प्रभावित हुए एवं आयल पाम की खेती हेतु इच्छा जाहिर की। कृषकों को ऑयल पाम रोपण करने वाले कृषकों को केन्द्र सरकार द्वारा दये अनुदान के अतिरिक्त राज्य शासन द्वारा विभिन्न घटकों में अतिरिक्त (टॉप-अप) अनुदान के बारे में बताया गया। धान प्रधान क्षेत्रों में फसल विविधिकरण के उद्देश्य से ऑयल पाम को अपनाने से कृषकों की आय में वृद्धि के साथ-साथ देश को खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में सहायता मिलेगी।
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