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राजनांदगांव । शासन के निर्देशानुसार अक्षय तृतीया के अवसर पर कम उम्र के बालक-बालिकाओं के विवाह पर रोक लगाने हेतु जिला प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर निगरानी एवं जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान अंतर्गत जिले, विकासखण्ड एवं ग्राम स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 के दौरान जिले में प्राप्त 4 बाल विवाह की सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी मामलों में सफलतापूर्वक रोकथाम की गई है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास गुरप्रीत कौर ने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं एवं 21 वर्ष से कम आयु के बालकों का शारीरिक एवं मानसिक विकास पूर्ण नहीं होता, जिससे उनके जीवन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न होती हैं। साथ ही शिक्षा बाधित होने से उनका भविष्य प्रभावित होता है। इसी उद्देश्य से बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 लागू किया गया है। उन्होंने नागरिकों से किसी भी क्षेत्र में बाल विवाह की सूचना मिलने पर पहले सामाजिक स्तर पर रोकने का प्रयास करने की अपील की है। यदि रोकथाम संभव न हो तो चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181 तथा आपातकालीन नंबर 112 पर तत्काल सूचना दें, ताकि समय कार्रवाई करते हुए बाल विवाह को रोका जा सके। उन्होंने बताया कि अधिनियम के तहत बाल विवाह कराने, उसमें शामिल होने या सहयोग करने वाले व्यक्तियों, वैवाहिक अनुष्ठानकर्ता, बैण्ड पार्टी एवं टेंट संचालक के विरूद्ध 2 वर्ष तक की सजा एवं 1 लाख रूपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। बाल विवाह रोकथाम के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास अधिकारी, परियोजना अधिकारी, पर्यवेक्षक तथा ग्राम पंचायत सचिवों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी नियुक्त किया गया है। जिला प्रशासन द्वारा बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के लिए जनप्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, स्वसहायता समूहों एवं नागरिकों से सक्रिय सहयोग करने की अपील की गई है।

By kgnews

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