राजनांदगांव | अखिल विश्व की अतिशय गौरवशाली सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, सनातन संस्कृति परंपरा में अद्भुत-अनुपम-अद्वितीय भगवत स्वरूप महावीर स्वामी जी के शुभ मंगल महोत्सव परिप्रेक्ष्य में नगर के विचारप्रज्ञ व्यक्तित्व डॉ. कृष्ण कुमार द्विवेदी ने सदैव अनुकरणीय चर्चा विमर्श में बताया कि महावीर स्वामी जी त्याग तप सत्य अहिंसा के महा प्रवर्तक हुए है। समग्र मानव जाति की भलाई और मुक्ति-मोक्ष का द्वार खोलने वाले स्वामी जी ने मानव को पंचमहावृत्त अहिंसा, सत्य, अस्तैय, ब्रम्हचर्य और अपरिग्रह सिखाए, जिनके सहज अनुकरण से ही सरलतापूर्वक व्यक्ति जीवन में महान बनकर मोक्ष पद पर आगे बढ़ता जाता है। मानव समाज की श्रेष्ठ, उत्कृष्ट संरचना के लिए महावीर स्वामी जी ने चातुर्वण्य संघ बनाया। सन्यासी-सन्यासनी-गृहस्थ-गृहणी सम्मलित होते है। स्वामी जी का संपूर्ण मानव जाति के जो कल्याण हेतु सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र जैसे उत्कृष्ट मोक्ष के मार्ग बतलाए। अपने बाल्यकाल से ही अतीव निडर, वीर, अदम्य साहसी, वर्धमान ने अनेक वर्षो के घोर तप-तपस्या और मौन व्रत साधना कर महावीर कहलाये और अपनी दिव्य ध्वनि, वाणी से संपूर्ण मानव जाति का उद्धार किया। उल्लेखनीय है कि जहाँ-जहाँ सन्यासी रूप में महावीर स्वामी जी ने चर्तुमास बिताए वे सभी आज स्थल – सिद्धग्राम, वैशाली, वाणिज्यग्राम, स्रावस्ती, कोसंबी, जुम्बिका आदि सभी सिद्ध – प्रसिद्ध जैन तीर्थस्थल बन चुके है। आइये हम सभी जैन-धर्म-पंथ के महाविस्तारक महावीर स्वामी जी के शिक्षा-दीक्षा को मन-प्राण से स्वीकारे और पुण्य भूमि भारत की गौरव गरिमा को विश्व में द्विगुणित करें।
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