राजनांदगांव के बसंतपुर स्थित जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण मरीज प्राइवेट हॉस्पिटलों में जाने को मजबूर हैं। अधिकांश डॉक्टर प्राइवेट अस्पतालों में प्रेक्टिस को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं। इसके कारण जिला अस्पताल स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। जिला अस्पताल में सिविल सर्जन डॉ. के के जैन हाल ही में सेवानिवृत्त को चुके हैं।वहीं डॉ. यूके चंद्रवंशी ने सिविल सर्जन का कार्यभार संभाल लिया है। यूके चंद्रवंशी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉक्टर है, जो ओपीडी में मरीजों की जांच और इलाज करते थे। वहीं महिला मेडिसिन पुरुष मेडिसिन भर्ती मरीजों का राउंड लेते थे, अब उन्हें प्रशासनिक कामकाज भी देखना होगा। व्यस्तता के चलते मेडिसिन विभाग और मरीजों से उनकी दूरी बढ़ सकती है।
अस्पताल में डॉक्टर्स की कमी से मरीज परेशान हैं।मेडिकल कॉलेज भी डॉक्टरों की कमी से जूझ रहाउन्होंने बताया कि सभी डॉक्टरों को समय पर आने-जाने और इलाज में ध्यान देने कहा गया है। डॉक्टर समय का ध्यान नहीं रखते 2 घंटे में ही निकल जाते हैं। इधर मरीज जिला अस्पताल में भटकते रहते हैं। सुविधाओं के अभाव में फिर मेडिकल कॉलेज का रुख करते हैं। वहां भी इसी प्रकार की व्यवस्था है। मेडिकल कॉलेज भी डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। जिला अस्पताल में टोटल 21 डॉक्टर्स होने चाहिए, जिसमें से 11 ही हैं। इनमें 10 और डॉक्टर्स की कमी है।मरीजों को आर्थिक परेशानियों से जूझना पड़ रहाअस्पताल में अन्य विभागों के कर्मचारियों का भी रवैया मरीजों के साथ सकारात्मक नहीं है, जिससे मरीज परेशान होकर प्राइवेट हॉस्पिटल की तरफ रुख कर रहे हैं, जिसके कारण मरीजों को आर्थिक परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। मरीजों की लंबी लाइन ओपीडी पर्ची बनाने के लिए लग रही है। डॉक्टर की वजह से मरीज भटक रहे हैं। एक्स-रे की सुविधा एक समय तक होती है। उसके बाद मरीज को बाहर का रुख करना पड़ता है।
