राजनांदगांव, जिले के एक छोटे से गांव नवागांव में रहने वाले बटालियन के एक जवान और उनकी पत्नी ने देहदान का संकल्प लिया है। फिलहाल वे देश की सेवा में हैं और इस दुनिया से जाने के बाद भी दूसरों को नया जीवन देने की चाह रखते हैं। इसी वजह से मौत के बाद भी सेवा का रास्ता उन्होंने चुना। इस निर्णय में उनकी पत्नी भी सहभागी बनी हैं। सोहनलाल छठवीं बटालियन रायगढ़ में बतौर आरक्षक पोस्टेड हैं। उनकी पत्नी रुखमणी साहू हाउस वाइफ हैं।

दोनों पति-पत्नी ने जरूरतमंदों को मरणोपरांत नए जीवन देने के लिए अंग दान एवं शरीर दान करने से चिकित्सा के क्षेत्र में बच्चे अध्ययन -अध्यापन कर सकें इसलिए लिए संकल्प लिया, जो मानव समाज के लिए एक प्रेरणा है। दोनों के द्वारा मरणोपरांत शरीर दान एवं अंग दान कर लोगों को जागरूक करने का काम किया जा रहा है। साहू ने बताया कि शरीर दान और अंग दान के लिए लगभग 12 से 15 लोगों को भी प्रेरित कर चुके हैं। सामाजिक कुप्रथा मृत्यु भोज न करने और उस राशि का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य एवं दूसरों की भलाई के लिए उपयोग करना चाहते हैं। साहू द्वारा जरूरतमंदों को अभी तक 14 बार रक्तदान कर लोगों नया जीवन दे चुके हैं। उनकी जितनी उम्र है उतने ही ज़रुरतमंद लोगों को रक्तदान कर नया जीवन देने का संकल्प है, जो इस वर्तमान परिदृश्य में एक मिसाल है।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई हो उनकी पत्नी रुखमणी ने सीएम विष्णुदेव साय को एक पत्र भी लिखा है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि अन्य राज्यों मध्यप्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, गुजरात में शरीर दान, अंग दान करने वाले व्यक्ति को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जा रही है, उसी तरह का सम्मान यहां भी मिलना चाहिए। यहां सिर्फ अंग दाताओं के परिजनों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाता है, जो जागरूकता लाने पर्याप्त नहीं है।

By kgnews

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