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राजनांदगांव : रजोहरण पाकर झूम उठे दीक्षार्थी: गुजरात में सिद्धार्थ के साथ कुल 15 मुमुक्षुओं ने भागवती दीक्षा ग्रहण की

09/12/2023

राजनांदगांव जैनों के तीर्थों का तीर्थधिराज श्रीशत्रुंजय महातीर्थ, पालीताना (गुजरात) में राजनांदगांव निवासी 18 वर्षीय मुमुक्षु सिद्धार्थ गोलछा पुत्र पारस-योगिता गोलछा की जैन भागवती दीक्षा सात दिसंबर को संपन्न हुई। यह दीक्षा पूरे भारत वर्ष से आए हुए हजारों श्रद्धालुओं, सैकड़ों साधु-साध्वियों की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ शृंगार, शासन प्रभावक, संयम सारथी आचार्य जिनपीयूष सागर सूरीश्वर श्रीजी के मुखारबिंद से संपन्न हुई। सिद्धार्थ गोलछा का दीक्षा के पश्चात नूतन नाम मुनि श्रेयसरत्न सागर श्रीजी हुआ। सिद्धार्थ के साथ कुल 15 मुमुक्षुओं ने भागवती दीक्षा ग्रहण की। दीक्षा विधि के तहत सर्वप्रथम प्रातः 6 बजे कार्यक्रम के प्रथम चरण में स्नात्र पूजा हुई। इसके तत्पश्चात् समस्त दीक्षार्थी भाई-बहनों की महोत्सव मंडप में पदार्पण हुआ। उसके बाद के माता-पिता, परिवारजनों ने आचार्य भगवंत को दीक्षा के लिए अनुमति प्रदान की, फिर आचार्य भगवंत द्वारा दीक्षा क्रिया शुभमुहूर्त में प्रारंभ की गई। शहर के योगिता-पारस गोलछा के 18 वर्षीय पुत्र सिद्धार्थ गोलछा ने सात दिसंबर को आचार्य जिनपीयूष सागरसूरीधर श्रीजी से जैन भागवती दीक्षा ग्रहण किया, वे अब मुनि श्रेयसरत्न सागर श्रीजी हो गए हैं। अहमदाबाद रवाना होने से पहले शहर में तीन दिवसीय संयम अनुमोदन महोत्सव का आयोजन 29 नवंबर से गोलछा परिवार, श्रीजैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ व सकल जैन समाज द्वारा किया गया। जिसमें शहर सहित आसपास के जैन समाज के लोग शामिल हुए दीक्षा क्रिया के अंतर्गत सभी दीक्षार्थियों को रजोहरण (ओघा) प्रदान किया गया, जिसे पाकर सभी खुशी से झूम उठे, नृत्य करने लगे इस दृश्य को देखकर सभी उपस्थित श्रावक-श्राविका वर्ग भावुक हो उठे, सभी की आंखों में खुशी के आंसू थे। सिद्धार्थ गोलछा ने भगवान महावीर स्वामी द्वारा बताए हुए जैन धर्म के पांच महाव्रत जिंदगी भर पालने कि नियम लिया जो इस प्रकार है, सत्य, अहिंसा, अचौर्य, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह। सिद्धार्थ गोलछा के दीक्षा कार्यक्रम में राजनांदगांव शहर के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए।

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