जयपुर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (उच्च शिक्षा) के विश्वविद्यालय शैक्षिक सम्मेलन में राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने कहा कि शिक्षकों को विद्यार्थियों के जीवन में उत्तरोत्तर विकास के लिए शिक्षा देनी चाहिए।
राज्यपाल बागडे ने रविवार को विश्वविद्यालय शैक्षिक सम्मेलन में अपने सम्बोधन में कहा कि शिक्षा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अपनी मां तथा परिवार से मिली शिक्षा से बच्चे छोटी उम्र में ही विशेष योग्यताओं को अर्जित कर लेते हैं। शिक्षक को विद्यार्थियों के सर्वागीण विकास को केन्द्र में रखकर अध्यापन करवाना चाहिए। इससे विद्यार्थी के जीवन में उत्तरोत्तर विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। शिक्षा बौद्धिक क्षमता बढ़ाने वाली हो। पाठयक्रम के अतिरिक्त सहशैक्षिक गतिविधियां भी ज्ञान प्राप्ति की साधन होनी चाहिए। इनसे विद्यार्थी कक्षा उत्तीर्ण होने के लिए आवश्यक पुस्तकीय ज्ञान से अधिक व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त करेगा।
राज्यपाल ने कहा कि मा.स. गोलवकर ‘गुरूजी’ के विचारों पर नई शिक्षा नीति में जोर देना चाहिए। शिक्षा में सुधार के लिए बनी नीतियों, शिक्षा आयोगों एवं कमेटियों के सुझाओं का प्रभाव प्राथमिक शिक्षा पर होने से विद्यार्थियों में राष्ट्र प्रथम का भाव जागृत होगा। भारतीय शिक्षा पद्धति में हमारी संस्कृति, देवधर्म एवं आदर्शों के आचरण को स्थान देना आवश्यक है। महर्षि दयानन्द सरस्वती जैसे महापुरूषों के मानवीय सद्गुणों युक्त नैतिक शिक्षा को अपनाने से विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास होगा। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ इसी भावना से शिक्षक निर्माण के कार्य में लगा है।
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