नई दिल्ली। बहुचर्चित अयोध्या राम जन्मभूमि के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इस प्रकरण में बुधवार का सुनवाई पूरी होने की संभावना है। इस मसले पर अभी तक जितनी भी बार सुनवाई हुई थी, उस पर पूरे देश की नजरें रही हैं और अब चूंकि सुनवाई अंतिम दौर में है, ऐसे में इसकी गहमागहमी बढ़ गई है। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने पक्षकारों को अपना पक्ष रखने के लिए समय बांटा, इससे तो यही आभास होता है कि अब मामले की आखिरी सुनवाई होने वाली है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी करने की बात कही थी, बाद में इस तारीख को बदलकर 17 अक्टूबर भी बताया गया था।सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने यह स्पष्ट किया कि वे किसी भी पक्ष को यह भरोसा नहीं दे रहे हैं कि उन्हें समय दिया जाएगा। ऐसा उन्होंने इसलिए कहा क्योंकि कुछ वकीलों ने पक्ष रखने का समय मांगा था।
ऐतिहासिक भूल सुधारने का आया समय
कोर्ट में हिंदू पक्ष महंत सुरेश दास ने मस्जिद को एक ऐतिहासिक गलती बताया। उनके वकील परासरन ने कहा कि बाबर एक आतताई थी और उसने यहां भगवान श्रीराम के जन्मस्थान पर मस्जिद का निर्माण किया था। यह एक ऐतिहासिक भूल थी जिसमें सुधार किए जाने का अब समय आ गया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सदा से एक सुसभ्य राष्ट्र रहा है जिसने आज तक किसी अन्य देश पर हमला नहीं किया। हमारे यहां तो अतिथि को भगवान का दर्जा दिया गया है। भारत में कई आक्रमणकारी आए और बाबर भी उनमें से ही एक था। ऐसे में उसे शासक कहना ठीक नहीं होगा।







