सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रीवा उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं का बन रहा है केंद्र

भोपाल

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। सरकार की प्राथमिकता है कि दूरस्थ इलाकों में रहने वाले लोगों को भी बड़े शहरों जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं मिलें।उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा है कि रीवा का सुपर स्पेशलिटी अस्पताल न केवल विंध्य क्षेत्र, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन रहा है। अस्पताल की चिकित्सकीय टीम ने यह साबित कर दिया है कि अब ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में भी जटिलतम चिकित्सा प्रक्रियाएं संभव हैं। लीडलैस पेसमेकर जैसे अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग हृदय रोगियों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है, और यह प्रक्रिया प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में नई ऊंचाइयां स्थापित करने का प्रतीक है।

रीवा स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। सतना जिले की 62 वर्षीय महिला मरीज को, जो पूर्ण हृदय अवरोध (हृदय की धड़कन 30) से पीड़ित थीं, अत्याधुनिक लीडलैस पेसमेकर का सफलतापूर्वक इंप्लांट कर नई जिंदगी प्रदान की गई। यह प्रक्रिया विश्वभर में हृदय रोगियों के लिए सबसे जटिल मानी जाती है और इसे सफलतापूर्वक संपन्न करना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, रीवा के लिए गौरव का विषय है। रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में यह प्रक्रिया डॉ. एस.के. त्रिपाठी और उनकी टीम ने तीन घंटे के कठिन ऑपरेशन के बाद सफलतापूर्वक पूरी की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए टीम को बधाई दी और उनकी मेहनत और प्रतिबद्धता की सराहना की।

See also  सिंहस्थ से पहले उज्जैन में घटिया निर्माण पर सांसद सख्त, गडकरी से की कड़ी कार्रवाई की मांग

लीडलैस पेसमेकर उन मरीजों के लिए उपयोगी, जिनके लिए पारंपरिक पेसमेकर नहीं हैं प्रभावी

लीडलैस पेसमेकर आधुनिक चिकित्सा तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह एक अत्यंत सूक्ष्म डिवाइस है, जिसका आकार एक कैप्सूल जितना होता है। इसे सीधे हृदय में प्रत्यारोपित किया जाता है, जिससे पारंपरिक पेसमेकर की तुलना में यह ज्यादा प्रभावी और सुरक्षित साबित होती है। इसमें कोई वायर (लीड) नहीं होती, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है। साथ ही, इसके इंप्लांट के बाद मरीज को कम परेशानी और अधिक लंबे समय तक राहत मिलती है। यह तकनीक विशेष रूप से उन मरीजों के लिए उपयोगी है, जिनके लिए पारंपरिक पेसमेकर प्रभावी नहीं होते।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *