अजीनोमोटो मध्य प्रदेश में होगा बैन? विधानसभा में बताया 8.5 करोड़ लोगों को खतरा

भोपाल
मध्य प्रदेश में 8.5 करोड़ से ज्यादा जनता के खाद्य अन्न में मिलावट हो रही है. वहीं कई जंक फूड में अजीनोमोटो जैसे घातक केमिकल का प्रयोग बिना रोकटोक हो रहा है. दरअसल, ये मुद्दा जबलपुर के उत्तर मध्य विधानसभा के विधायक अभिलाष पांडे ने सदन में उठाए. उन्होंने बजट सत्र के अंतिम दिन मध्य प्रदेश में तेजी से बढ़ती जंक फूड की खपत और इनमें मिलाट का मुद्दा उठाते हुए. स्वास्थ्य मंत्री से इनपर रोक लगाने की मांग की. उनके साथ भाजपा विधायक अजय विश्नोई ने भी यह मांग की.

अजीनोमोटो से बड़ा खतरा

इस मामले पर भाजपा विधायक अजय विश्नोई ने कहा कि जंक फूड में अजीनोमोटो डाला जाता है, जो सेहत के लिए बहुत खतरनाक होता है. जंक फूड में उन चीजों का इस्तेमाल हो रहा है, जो विकसित देशों में प्रतिबंधित. इसका समर्थन करते हुए सदन में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, '' पिछले दिनों मैंने इंदौर के प्रमुख डॉक्टर्स की एक बैठक बुलाई थी. उनसे पूछा था कि बहुत कम उम्र में हार्ट अटैक आ रहा है, कैंसर हो रहा है. इस पर डॉक्टरों ने बताया कि जंक फूड से बचना चाहिए. कुछ ऐसे जंक फूड हैं, जिनमें अलग-अलग तरह के सॉल्ट, विनेगर वगैरह डाले जाते हैं. जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खरे नहीं पाए जाते. ये बच्चों के लिए खतरनाक हैं, ऐसे में मेरी मांग है कि सरकार को इस मामले में जांच करवाना चाहिए.''

विधायक अभिलाष पांडे ने उठाया था सवाल

भाजपा विधायक डॉ. अभिलाष पांडे ने सदन में स्वास्थ्य मंत्री से जंक फूड में मिलाए जा रहे हानिकारक पदार्थों पर रोक लगाने की मांग उठाई थी. उन्होंने कहा, '' यह प्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता से जुड़ा हुआ मामला है. वर्तमान में जिस प्रकार से खाद्यान्न पदार्थ में मिलावट हो रही है. छोटे-छोटे स्ट्रीट वेंडर अनेक स्थानों पर दुकान लगा रहे हैं. इस पर पूरे सिस्टम में अनियमितताएं देखी जा रही हैं. जिस प्रकार अजीनोमोटो, फ्लेवर इनग्रेडिएंट्स और प्रिजर्वेटिव्स समेत अन्य चीज डाली जा रही हैं, इस पर गंभीर कानून बनाए जाने की आवश्यकता है.''

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खान पान दुकानों पर सघन जांच की आवश्यकता

विधायक डॉ. अभिलाष पांडे ने आगे कहा, '' जबलपुर जिले में केवल 17 दुकानों की जांच हुई है. जबकि केवल मेरी विधानसभा में ही डेढ़ से 2 हजार खान-पान की छोटी दुकानें हैं. पूरे जिले में केवल 17 ही जांच हो पाएंगी तो इस कार्रवाई को और तेजी से बढ़ाने की जरूरत है. आज जिस प्रकार से बच्चों में फैट और विभिन्न प्रकार की विकृतियां सामने आ रही हैं, वह इन सभी फास्ट फूड के कारण ही है. ऐसे में सख्ती से जांच और कार्रवाई की जरूरत है.''

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