छत्तीसगढ़

राजनांदगांव : महिलाओं द्वारा हस्तनिर्मित बैग इंटरनेशनल मार्केट में मचा रही है धूम

राजनांदगांव। सपने और सफलता के बीच के सफर में हमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि कड़ी मेहनत, संघर्ष, आलोचना और दृढ़ संकल्प। तभी कोई सफलता का स्वाद चख सकता है। कुछ  ऐसा ही कर दिखाया है रूचि ऑर्गेनाइजेशन की महिलाओं ने, इनकी बनाई हस्तनिर्मित बैग इंटरनेशनल मार्केट में धूम मचा रही हैं। रुचि संस्था की महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि सुई-धागे की बारीक कारीगरी से न सिर्फ खूबसूरत बैग बनाए जा सकते हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव भी रखी जा सकती है। इन महिलाओं ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ निश्चय से यह साबित कर दिया है कि परिस्थितियां कितनी भी विपरीत क्यों न हों, अगर मन में कुछ करने का जुनून हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
रूचि ऑर्गेनाइजेशन की डायरेक्टर रचना शर्मा ने कहा कि, हमारे समाज में महिलाओं को अक्सर सीमित दायरे में रखा जाता है, लेकिन जब वे अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचान लेती हैं, तो हर कठिनाई को पार कर जाती हैं। ये महिलाएं केवल अपने लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं। सुई-धागे के जरिए उन्होंने अपनी एक नई पहचान बनाई है और यह संदेश दिया है कि अगर आपमें हौसला है तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती।
हाल ही में एक प्रेरणादायक कार्यक्रम में रूचि संस्था की महिलाओं को सम्मानित किया गया, जिसमें विशेष रूप से शाहीन अख्तर, कु. कुंती धीवर, उत्तरा देवांगन, टुकेश्वरी देवांगन, उमेश्वरी देवांगन, आरती महिलांग, शैलेन्द्री पटेल, कृष्णा धारा, कु. सीमा वर्मा, डिकेश्वरी मंडावी और तीजन साहू जैसी कर्मठ महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिया कि आत्मनिर्भरता का मार्ग कठिन हो सकता है, लेकिन असंभव नहीं। इनमें से कुछ महिलाएं ऐसी भी थीं, जिन्होंने अपने जीवन में अनेक संघर्षों का सामना किया। किसी ने पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते अपने सपनों को दबाया, तो किसी ने आर्थिक तंगी को अपनी मजबूती बना लिया,ख् लेकिन रुचि ऑर्गेनाइजेशन ने इन्हें एक ऐसा मंच दिया, जहां वे अपने हुनर को पहचान सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
आज ये महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बनी हैं, बल्कि समाज में भी एक सशक्त पहचान बना चुकी हैं। इनकी सफलता हमें यह सिखाती हैं कि हुनर, मेहनत और दृढ़ निश्चय से कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को नई दिशा दे सकता है। रूचि ऑर्गेनाइजेशन की यह पहल निश्चित ही समाज के अन्य लोगों को भी प्रेरित करेगी और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

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