राजनांदगांव : एनजीओ, क्लब व समितियों के लिए कानूनी जागरूकता जरूरी : डॉ. हेमशंकर साहू

० 25 वर्षों से समाजसेवा संगठनों को दे रहे दस्तावेजी और कानूनी मार्गदर्शन

राजनांदगांव। राज्य के सामाजिक विकास और सिविल सोसाइटी के सशक्तिकरण में उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे वरिष्ठ विधिक सलाहकार डॉ. हेमशंकर जेठमल साहू ने एनजीओ, सोसाइटी, समिति, क्लब और संगठनों की कानूनी सुदृढ़ता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि पारदर्शी दस्तावेजी कार्यप्रणाली ही संगठनों की नींव को मजबूत बनाती है।
चर्चा करते हुए डॉ. साहू ने बताया कि वे पिछले 25 वर्षों से पंजीकृत संगठनों को दस्तावेज संबंधी सहायता और कानूनी परामर्श प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सोसाइटी पंजीयन अधिनियम 1973 के तहत पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज शुल्क की अदायगी अनिवार्य होती है। इसमें कोई चूक संस्था के भविष्य के नवीनीकरण या विभागीय प्रक्रिया में अड़चन बन सकती है।

डॉ. साहू ने बताया कि कई बार संगठन समय पर अपने दस्तावेजों का नवीनीकरण नहीं करा पाते, जिससे उन्हें प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक संस्था के पंजीकरण के तुरंत बाद दस्तावेजों की उपयोगिता, लेखा परीक्षण, वार्षिक विवरण, नवीनीकरण की समय-सीमा जैसे विषयों पर कार्यशाला आयोजित की जानी चाहिए, ताकि संस्था प्रमुखों को कानूनी दायित्वों की जानकारी हो।
डॉ. साहू का मानना है कि कई संगठन केवल कागजी रूप में सक्रिय होते हैं और समय पर वार्षिक रिपोर्ट या लेखा विवरण प्रस्तुत नहीं करते जिससे उनकी वैधता संकट में आ जाती है। इससे सरकारी अनुदान और सहयोग में भी बाधा उत्पन्न होती है।

उन्होंने सुझाव दिया कि फर्म एवं सोसाइटी पंजीयन कार्यालय द्वारा समय-समय पर जिला स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। इन कार्यक्रमों में संस्था प्रमुखों को वार्षिक दस्तावेज, बैंक संचालन, लेखा प्रबंधन सहित अन्य कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी दी जानी चाहिए।
डॉ. साहू ने कहा कि जिन संस्थाओं ने तीन या अधिक वर्षों से कोई दस्तावेज विभाग में जमा नहीं किया है, उनके लिए विशेष पुनर्सक्रियता अभियान चलाया जाना चाहिए ताकि वे पुनः सक्रिय होकर समाजसेवा में योगदान दे सकें।
अंत में उन्होंने मीडिया से अपील की कि वह ऐसे संगठनों को जागरूक करें जो दस्तावेजी जानकारी के अभाव में समाज सेवा की राह में पीछे छूट जाते हैं। उन्होंने कहा-पारदर्शिता और समयबद्ध प्रक्रिया ही किसी संगठन की विश्वसनीयता की पहचान होती है।

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