जबलपुर में रोहिंग्या के कारण मकान बिक रहे, लोग गंदगी और शराबखोरी से परेशान

जबलपुर

जबलपुर शहर के ग्वारीघाट थाना अंतर्गत ललपुर नई बस्ती में हालात इस कदर बिगड़ गए हैं कि लोग अपने घर बेचने को मजबूर हो रहे हैं. बस्ती में रहने वाले स्थानीय परिवारों ने घरों के बाहर “मकान बिकाऊ है” के पोस्टर और पंपलेट चिपकाना शुरू कर दिया है. बताया जा रहा है कि यहां करीब दो दर्जन से ज्यादा घरों पर इस तरह के पोस्टर लगाए गए हैं.

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पिछले दो सालों से बस्ती में बाहरी लोगों का जमावड़ा बढ़ गया है. इनमें रोहिंग्या मुसलमान और अन्य बाहरी लोग शामिल बताए जा रहे हैं. रहवासियों का कहना है कि ये लोग देर रात तक शराब पीते हैं, मांस और मछली खाते हैं और बचा हुआ कचरा व हड्डियां बस्तियों में फेंक देते हैं. इसके कारण पूरे इलाके का माहौल बिगड़ रहा है और स्वच्छता पर भी बुरा असर पड़ रहा है.
पुलिस कर रही जांच

महिलाएं और बच्चे असुरक्षा का अनुभव करने लगे हैं. स्थानीय लोगों ने कई बार इस समस्या को लेकर आपत्ति जताई और पुलिस थाने में शिकायत भी दर्ज करवाई. लेकिन जब कोई ठोस समाधान नहीं निकला तो आखिरकार उन्होंने मकान बेचकर यहां से जाने का मन बना लिया. इसके विरोध में हिंदूवादी संगठनों के साथ रहवासियों ने पुलिस थाने पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और मांग की कि बाहरी लोगों को यहां से हटाया जाए. मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्वारीघाट पुलिस ने जांच के बाद उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया है.
पलायन करने को मजबूर रहवासी

पुलिस ने अभी तक कोई ठोस कदम सामने नहीं उठाया है. वही रहवासियों का कहना है कि बस्ती का पुराना शांत वातावरण अब अशांत हो चुका है. सामाजिक ताने-बाने पर असर पड़ रहा है और लोग अपने बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं. उनका कहना है कि अगर प्रशासन समय रहते कार्रवाई नहीं करता तो इलाके का माहौल और ज्यादा बिगड़ सकता है. फिलहाल ललपुर बस्ती के लोग अपने घर बेचने और कहीं और बसने की तैयारी कर रहे हैं, जो कि एक चिंताजनक संकेत है.

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क्या है पूरा मामला?

 शिवराज बस्ती में रहने वाले कुछ परिवारों ने बताया है कि पिछले कुछ समय से करीब 50 लोग यहाँ आकर रह रहे हैं, जिनमें से ज्यादातर खानाबदोश (जिनका कोई स्थायी निवास नहीं) हैं। कुछ लोग झोपड़ियाँ बनाकर रह रहे हैं और कुछ किराए पर कमरे लिए हैं।

स्थानीय निवासियों ने बताय कि ये लोग भीख माँगते हैं, गंदगी फैलाते हैं और उपद्रव कर माहौल को खराब करते हैं। जब कुछ लोगों ने इनका विरोध किया तो अवैध घुसपैठियों ने गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया। इसी वजह से कई परिवार अपने घर छोड़कर चले गए हैं और घरों के बाहर लिखवा दिया है ‘मकान बेचना है’। यह मामला 5 सितंबर 2025 के आस-पास का बताया जा रहा है। इसका एक वीडियो यूट्यूब पर भी मिला है, जिसकी ग्राउंड रिपोर्टिंग देखी जा सकती है।

बस्ती में बने दो गुट

अवैध घुसपैठियों को लेकर शिवराज बस्ती के लोगों में भी दो गुट बन गए हैं। एक गुट इन्हें हटाना चाहता है और मानता है कि ये लोग बांग्लादेशी या रोहिंग्या हैं और इनसे खतरा है। वहीं, जिन लोगों ने घुसपैठियों को किराए पर कमरे दिए हैं, वे इनका समर्थन कर रहे हैं। उनका कहना है कि ये लोग अपना कमाते-खाते हैं और कोई परेशानी पैदा नहीं करते हैं। यह पूरा मामला अब पुलिस की जाँच के दायरे में आ गया है।

बस्ती में रहने वाली एक महिला ने बताया कि वो इस बस्ती में कई सालों से रह रही हैं। इसके अलावा आधार कार्ड बारिश में बह गया और लोग उन्हें चोरी करने वाला, गंदगी फैलाने वाला बताते हैं।

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पुलिस की जाँच और विरोधाभासी बयान

इन पोस्टरों की जानकारी मिलने पर कुछ हिंदूवादी संगठनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जाँच शुरू की तो पता चला कि यहाँ रहने वाले लोग महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के हैं और खानाबदोश हैं। पुलिस ने बताया कि ये लोग कहीं से भगाए नहीं गए हैं, बल्कि अपनी मर्जी से यहाँ रह रहे हैं।

कमरे किराए पर लेकर रहने लगे हैं

नर्मदा किनारे बसी शिवराज बस्ती में सब कुछ सामान्य चल रहा था। करीब तीन सप्ताह पहले बस्ती में पोस्टर लगना शुरू हो गए कि मकान बेचना है। कुछ लोग घरों मे ताले लगाकर कहीं और रहने चले गए।

हिंदूवादी संगठनों का आरोप है कि बीते कुछ समय में धीरे-धीरे यहां पर 50 से अधिक लोग आकर बस गए हैं। ये यहां मांस के टुकड़े भी फेंक रहे हैं। कुछ लोगों ने बस्ती में झोपड़ी बना ली, तो कुछ ने किराए पर कमरे ले लिए।

स्थानीय रहवासियों ने बताया कि अचानक यहां आकर बसे ये लोग दिनभर भीख मांगते हैं। रैकी करते हैं कि कौन सा घर खाली है, कहां ताला लगा हुआ है, जिससे कि वहां पर चोरी की जा सके। कुछ लोगों ने जब इनके यहां रहने का विरोध किया तो ये गाली-गलौज करते हुए महिलाओं को अर्धनग्न होकर खड़ा कर देते हैं।

पहले एक झोपड़ी बनी
 फिर बढ़ती गई संख्या स्थानीय निवासियों का कहना है कि कुछ महीने पहले बस्ती में सिर्फ एक झोपड़ी बनी थी, फिर धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती गई। इनमें से कुछ लोग किराए का कमरा लेकर रह रहे थे। लोगों का कहना है कि यदि इनकी संख्या बढ़ती गई तो इन्हें हटाना बहुत ही मुश्किल हो जाएगा।

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बजरंग दल के प्रचारक रमेश तिवारी ने कहा- शिवराज बस्ती के मुख्य मार्ग पर इन लोगों ने इतनी गंदगी फैला दी है कि निकलना मुश्किल हो गया है। 10-20 कुत्ते पाल रखे हैं, जिनसे हमेशा डर बना रहता है। हम किसी को जबरन यहां से बेघर नहीं कर रहे हैं, पर जो लोग गंदगी फैलाते हैं, बिना दस्तावेजों के रहते हैं, उनको यहां रहने नहीं दिया जाएगा।

पुलिस-प्रशासन को यह भी जांच करना होगा कि आखिर जो लोग यहां रह रहे हैं, क्या उनके आधार कार्ड बने हैं, अगर हैं तो कहां और कैसे बन गए।

 

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