राजनांदगांव, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के चलते बसंतपुर स्थित कृषि उपज मंडी में धान की आवक कम है। पोहा उद्योगों को पोहा बनाने के लिए महामाया वाजिब दाम पर महामाया धान नहीं मिल रहा।

जिले के 48 पोहा उद्योगों में 70 फीसदी उद्योगों में काम ठप है। रोज यहां 20 हजार कट्टा धान की जरूरत पड़ती है जबकि ज्यादा कीमत में 15 हजार कट्टा महामाया धान ज्यादा कीमत में खरीदना पड़ रहा है। बाहरी धान को जिले में आने से रोका जा रहा और पोहा-मुरमुरा उद्योगों में अवैध धान की तलाश करने छापामार कार्रवाई की जा रही है।

सभी कारणों के चलते पोहा उद्योगों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। यही स्थिति बनी रही तो आगामी कुछ दिनों में 100 फीसदी मिलों में तालेबंदी की नौबत आ सकती है। जिलेभर की इन 48 पोहा मिलों में करीब 5 हजार मजदूर काम करते हैं। अपनी मांगों ओर समस्याओं को लेकर विगत दिनों पोहा-मुरमुर्रा संघ ने कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने महामाया धान उपलब्ध कराने की मांग की थी। मिलर्स का कहना है यहां दूसरे राज्यों से महामाया धान पहुंचता है। दूसरे राज्यों में 1800 से 2200 होने से लोकल व्यापारी प्रतिस्पर्धा से बाहर होते जा रहे हैं।

इस धान की आवक कम, दाम भी ज्यादा मंडी में औसत 2700 रुपया क्विंटल में महामाया धान खरीदना पड़ रहा। यहां पोहा की पोहा मिलों में पहले दूसरे राज्यों से महामाया धान आता रहा है और यहां का पोहा दूसरे राज्यों तक जाता है। इस कारण विगत दिनों राज्य सरकार ने मंडी शुल्क में थोड़ी राहत दी थी। वर्तमान में समर्थन मूल्य पर खरीदी के चलते बाहरी धान रोका जा रहा है। मिलर्स की मांग के मुकाबले मंडी में आवक कम है। इस कारण पोहा मिलों में संकट का दौर चल रहा है। महामाया धान की कम​ी है।

By kgnews

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