मोदी सरकार में मध्य प्रदेश के अफसरों का जलवा, दो IAS अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी

भोपाल 
 मध्य प्रदेश कैडर के प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में जलवा बरकरार है। नए साल की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बड़ा बदलाव किया है। केंद्रीय नियुक्ति समिति की मंजूरी के बाद जारी इस सूची में मध्य प्रदेश कैडर के दो वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।

इनका हुआ प्रमोशन
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार केरालिन खोंगवार देशमुख (IAS, 1996 बैच) को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद से स्थानांतरित कर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया गया है। वहीं, असित गोपाल (IFS, 1990 बैच) को टेक्सटाइल मंत्रालय में पदोन्नति दी गई है। अब वे अतिरिक्त सचिव के बजाय विशेष सचिव और वित्तीय सलाहकार के रूप में कार्य करेंगे।

दिल्ली में एमपी कैडर का दबदबा
मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारी अपनी कार्यकुशलता के कारण केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर हमेशा प्राथमिकता पाते रहे हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड और विभागीय आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की स्थिति कुछ इस प्रकार है।

केंद्र में एमपी से तीन दर्जन अधिकारी
वहीं, मध्य प्रदेश कैडर के करीब 35 से 40 आईएएस अधिकारी वर्तमान में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में सचिव, अतिरिक्त सचिव, संयुक्त सचिव और निदेशक स्तर पर तैनात हैं। इनमें से कई अधिकारी पीएमओ और नीति आयोग जैसे महत्वपूर्ण विभागों में सक्रिय हैं।

आईपीएस अधिकारियों का भी दबदबा
एमपी कैडर के लगभग 25 से 30 आईपीएस अधिकारी केंद्रीय एजेंसियों जैसे इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), सीबीआई (CBI), बीएसएफ (BSF) और सीआरपीएफ (CRPF) में प्रतिनियुक्ति पर हैं। कई अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) कार्यालय से भी जुड़े रहे हैं।

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भारतीय वन सेवा के अधिकारी भी
वन क्षेत्र में मध्य प्रदेश के समृद्ध अनुभव को देखते हुए केंद्र में 10 से 12 आईएफएस अधिकारी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ-साथ अन्य मंत्रालयों में वित्तीय सलाहकार और सचिव स्तर के पदों पर सेवाएं दे रहे हैं।

इसलिए चुना जाता है MP
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक क्षमता और मध्य प्रदेश की भौगोलिक-सामाजिक परिस्थितियों के अनुभव के कारण इन अफसरों को केंद्र में नीति निर्धारण और वित्तीय प्रबंधन जैसे संवेदनशील कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी जाती रही है।

 

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