जबलपुर में हजारों वाहन मालिक हो रहे परेशान, संभाग में एक एजेंसी कर रही फिटनेस जांच

जबलपुर. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) के हालिया आदेश ने संभाग भर के वाहन संचालकों की परेशानी बढ़ा दी है। नए निर्देशों के तहत अब व्यावसायिक व सवारी वाहनों की फिटनेस जांच जिला स्तर पर नहीं, बल्कि संभागीय स्तर पर की जाएगी। इसके तहत जबलपुर संभाग के जबलपुर सहित नरसिंहपुर, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, कटनी, मंडला और डिंडौरी जैसे जिलों के वाहनों को फिटनेस प्रमाणीकरण के लिए जबलपुर स्थित ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) पहुंचना होगा।

परेशानी की बात ये है कि शहर में फिलहाल एक ही एटीएस कार्यशील है ऐसे में संभागीय स्तर पर हजारों वाहनों की फिटनेस जांच करने में व्यावहारिक परेशानियां आना तय है। वाहन चालकों का कहना है कि 200 से 210 किलोमीटर दूर जबलपुर तक वाहन लाना बेहद खर्चीला होगा। फिटनेस प्रमाण पत्र की निर्धारित फीस भले ही करीब एक हजार रुपये हो, लेकिन आवागमन, ईंधन, चालक-खलासी, ठहराव और अन्य खर्चों को जोड़ दिया जाए तो कुल खर्च 10 से 12 हजार रुपये तक पहुंच सकता है।

अवैध वसूली बढ़ने का डर

परिवहन से जुड़े संगठनों का आरोप है कि सीमित केंद्र और अधिक दबाव की स्थिति में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल सकता है। पहले भी जबलपुर एटीएस में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। ऐसे में नए आदेश से अवैध वसूली और बिचौलियों की भूमिका बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। जिला स्तर पर प्रतिमाह औसतन 200 वाहनों की फिटनेस जांच होती थी, जिसमें प्रतिदिन 10 से 12 वाहनों को प्रमाण पत्र जारी किए जाते थे।

नए आदेश के बाद जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला और डिंडोरी से मिलाकर हर माह करीब 1600 से अधिक वाहन जबलपुर पहुंच सकते हैं। जबकि निलंबित एटीएस कब चालू होगा, इसको लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। वर्तमान में जो क्रियाशील एटीएस में हर दिन 35 से ज्यादा वाहन फिटनेस के लिए पहुंच रहे हैं।

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अधिकारियों का पक्ष
इस संबंध में जबलपुर आरटीओ संतोष पाल का कहना है कि केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से नया आदेश जारी हुआ है। संभागीय स्तर पर पर निर्देश जारी हुए है। वाहन मालिक अब फिटनेस प्रमाण पत्र के लिए जबलपुर आएंगे।

ये समस्या भी
ऑटो से लेकर कार, ट्रक सभी निजी और कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जारी होना है। ऐसे में छिंदवाड़ा या बालाघाट जिले से ऑटो चालक को जबलपुर आना बेहद खर्चीला साबित होगा। एक पूरा दिन वह जबलपुर आने के लिए हजारों रुपये का डीजल फूंकेगा। इसके बाद एक दिन के लिए शहर से बाहर जाने के लिए परमिट बनवाएंगा। इसके बाद यदि एक दिन में जांच पूरी नहीं हुई तो यहां रूकना पड़ेगा। ऐसे में फिटनेस प्रमाणीकरण करना काफी महंगा साबित होगा।

जिला परिवहन विभाग को फिटनेस से हटाया गया
मोर्थ द्वारा प्रदेश के 42 जिलों के लिए जारी पत्र में जिला परिवहन कार्यालयों को व्यावसायिक और सवारी वाहनों की फिटनेस जांच से पूरी तरह अलग कर दिया गया है। नए आदेश के मुताबिक अब फिटनेस जांच केवल नजदीकी ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन में ही होगी। इसके लिए वाहन मालिकों को ऑनलाइन बुकिंग करानी अनिवार्य होगी।

जिला परिवहन विभाग अब फिटनेस से संबंधित कोई भी कार्य नहीं करेगा। शहर में फिलहाल फिटनेस प्रमाणीकरण के लिए केवल कटंगी रोड़ पर स्थित एक निजी एजेंसियां कार्यशील हैं। जानकारों का कहना है कि जबलपुर संभाग के सभी जिलों के वाहन यदि एक ही केंद्र पर जांच के लिए आएंगे तो क्षमता से कहीं अधिक दबाव बनेगा। इससे जांच में देरी, लंबी प्रतीक्षा सूची और अव्यवस्था की आशंका है।

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पहले से बंद एटीएस फिर भी निर्भरता
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस जबलपुर एटीएस पर पूरे संभाग के वाहनों की निर्भरता तय की गई है, वह स्वयं अनियमितताओं के चलते सस्पेंड है। कुछ समय पहले परिवहन विभाग ने गड़बड़ियों के आरोपों के बाद जबलपुर स्थित ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का लाइसेंस अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था।

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