कर्नल सोफिया अपमान मामला: SC ने MP मंत्री को फटकार, कहा—माफी में हुई देरी, 2 हफ्ते में तय हो केस की तारीख

भोपाल 

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मंत्री कुंवर विजय शाह पर मुकदमा चलाने की अनुमति दिए जाने के मुद्दे पर फैसला लिया जाए। ऑपरेशन सिंदूर का ब्योरा देश को देने वाली कर्नल को मध्य प्रदेश के मंत्री ने 'आतंकियों की बहन' कह डाला था।सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि राज्य सरकार विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट पर कई महीनों से कोई फैसला नहीं ले रही है। जबकि विशेष जांच दल ने अपनी जांच पूरी कर ली है और अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी है।

बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की ओर से मुकदमा चलाए जाने की मांगी गई अनुमति पर देरी को लेकर सवाल उठाए। सर्वोच्च अदालत के आदेश पर एसआईटी इस मामले की जांच कर रही है। सीजेआई कांत ने कहा, 'आप 19 अगस्त से एसआईटी रिपोर्ट पर बैठे हुए हैं। कानून आप पर दायित्व डालता है और आपको निर्णय लेना होगा। आज 19 जनवरी है।' अदालत ने एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट खोली और पाया कि विभिन्न पहलुओं की जांच के बाद मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार की मंजूरी मांगी है।

सर्वोच्च अदालत ने कहा, 'हमें बताया गया कि राज्य की ओर से कोई ऐक्शन हीं लिया गया है और मामला लंबित है। हम मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश देते हैं कि कानून के मुताबिक मंजूरी पर उचित कदम उठाए जाएं।' इससे पहले राज्य सरकार ने कहा था कि उन्होंने एसआईटी की अपील पर फैसला नहीं लिया है क्योंकि मामला सर्वोच्च अदालत में लंबित है। शाह की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने जब यह बताया कि शाह ने पहले ही अपनी टिप्पणियों के लिए माफी मांग ली थी तो अदालत ने कहा, 'माफी कहां है? रिकॉर्ड में तो कुछ भी नहीं है। अब तो बहुत देर हो चुकी है।'

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प्रस्तावित कार्रवाई पर भी रिपोर्ट पेश करने को कहा बेंच ने यह भी कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट में कुछ अन्य मामलों का भी जिक्र है, जहां शाह ने कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी से इन मामलों में की जाने वाली प्रस्तावित कार्रवाई पर भी रिपोर्ट पेश करने को कहा।

सोमवार को मंत्री विजय शाह की ओर से सीनियर वकील मनिंदर सिंह ने कोर्ट को सूचित किया कि उन्होंने (विजय शाह ने) अपना माफीनामा दर्ज करा दिया है। वे जांच में सहयोग कर रहे हैं। हालांकि, बेंच ने कहा कि ये कोई माफीनामा नहीं है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा-

माफी मांगने में बहुत देर हो चुकी है। हमने पहले ही इस बात पर टिप्पणी की थी कि किस तरह की माफी मांगी जा रही है।

इससे पहले, कोर्ट ने शाह की ओर से दी गई सार्वजनिक माफी को "कानूनी दायित्व से बचने के लिए महज मगरमच्छ के आंसू" बताकर खारिज कर दिया था। बाद की सुनवाई में, अदालत ने उनकी "ऑनलाइन माफी" पर असंतोष जताया।

अदालत ने कहा था- धैर्य की परीक्षा ले रहे

अदालत मंत्री कुंवर विजय शाह की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक बयान के आरोप में खुद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई 2025 को कर्नल कुरैशी के खिलाफ अपनी टिप्पणियों पर सार्वजनिक रूप से माफी न मांगने के लिए शाह को फटकार लगाई थी और कहा था कि वह ‘अदालत के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं।’
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बयान पर घिरे मंत्री

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सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 28 मई को कर्नल कुरैशी के खिलाफ शाह की विवादास्पद टिप्पणियों के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के सामने कार्यवाही बंद करने का आदेश दिया और एसआईटी से स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। इससे पहले हाई कोर्ट ने शाह को फटकार लगाई थी और उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। एक वीडियो वायरल होने के बाद शाह आलोचनाओं के घेरे में आ गए थे, जिसमें उन्हें कथित तौर पर कर्नल कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए देखा गया था। कुरैशी ने एक अन्य महिला अधिकारी विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ मिलकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर मीडिया ब्रीफिंग के दौरान देश भर में प्रसिद्धि हासिल की थी।

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