राजनांदगांव में मतांतरण का ‘केरल कनेक्शन’: पास्टर डेविड चाको ने 20 साल में 2000 परिवारों को फंसाया

राजनांदगांव
 जिला मुख्यालय से नौ किमी दूर ग्राम धर्मापुर से संचालित हो रहे ईसाई मतांतरण नेटवर्क ने राज्य के आदिवासी अंचल में दो हजार से ज्यादा परिवारों को मतांतरित किया है। कमांडर डेविड चाको ने अपने स्लीपर सेल ‘पाल’ की मदद से 20 सालों में इस अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया है। पुलिस ने डेविड के ठिकानों से भी बड़ी संख्या में आदिवासी परिवारों की निजी जानकारी वाले दस्तावेज बरामद किए थे।

चौंकाने वाली सच्चाईयां धीरे-धीरे सामने आ रही

इस प्रकरण में जैसे जैसे दिन गुजर रहे हैं वैसे ही चौंकाने वाली सच्चाईयां धीरे-धीरे सामने आ रही हैं। आठ जनवरी को सुकुलदैहान पुलिस चौकी में डेविड चाको के खिलाफ अवैध आश्रम चलाने, नाबालिग आदिवासी बच्चों को बगैर प्रशासनिक जानकारी के अवैध तरीके से आश्रम में रखने और संदिग्ध गतिविधियों के मामले में हिंदू जागरण मंच के सुशील लड्ढा की शिकायत पर एफआइआर दर्ज की गई थी।

धर्मापुर में रिहैबिलेशन सेंटर के नाम पर इस नेटवर्क को आपरेट करने वाला कमांडर डेविड चाको वर्ष 2006 से छत्तीसगढ़ में आदिवासी क्षेत्रों में सक्रिय है। वह इसी समय केरल के इंडिया पेटाकोस्टल चर्च आर्गनाईजेशन से जुड़ा। उसने इन 20 वर्षों में सैकड़ों परिवारों के मतांतरण में अपनी भूमिका निभाई है। यही कारण रहा कि आइपीसी से बतौर पास्टर जुड़ने के बाद अब वह प्रदेश उपाध्यक्ष के तौर पर यूनिट इंचार्ज बना बैठा है।

डेविड चाको 1998 में छत्तीसगढ़ आया था

मूल रुप से केरल का रहने वाला डेविड चाको 1998 में छत्तीसगढ़ आया था। फिलहाल इसके बाद से वह छत्तीसगढ़ में ठिकाने बदल-बदल कर रहता रहा। जांच के बाद जो जानकारी सामने आ रही है कि उसके मुताबिक डेविड चाको वर्ष 2006 से ही राजनांदगांव में रह रहा था। इससे पहले वह लंबे समय तक दल्ली राजहरा में भी रहा।

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घरों में फ्रिज रिपेयर करता था डेविड, आज लाखों का आसामी

स्थानीय लोगों के मुताबिक, राजनांदगांव में आने के बाद डेविड फ्रिज रिपेयरिंग का काम करता था। ईसाई परिवारों से बातचीत में भी यही जानकारी निकलकर सामने आ रही है। आज उसके पास लाखों की संपत्ति होने की जानकारी है। बताया जाता है कि डेविड हैदराबाद की एक संस्था से जुड़ा और इसके बाद ही उसने संपित्त अर्जित करना शुरु किया। इसके बाद आइपीसी में आने के बाद वह विदेश दौरों पर भी जाने लगा।

‘पाल’ के पद पर की भर्तियां, ये मतांतरण के स्लीपर सेल

डेविड चाको स्वयं को आइपीसी आर्गनाईजेशन में मजबूत करने के अलावा छत्तीसगढ़ में मतांतरण को बढ़ावा देने लोगों की भर्तियां भी की। इन्हें ‘पाल’ कोडनेम दिया गया जो कि आदिवासी इलाकों में स्लीपर सेल की तरह काम करते हैं। ‘पाल’ आदिवासी क्षेत्रों में निर्धन, बीमार, अकेले परिवार और अनाथों की जानकारी एकत्रित करते हैं, जिसके बाद सुनियोजित तरीके से उन्हें मतांतरित किए जाने की योजना बनाई जाती है।

विदेशी फंडिंग, संदिग्ध प्रशिक्षण माड्यूल से होगा राजफाश

पिछले 23 दिनों से डेविड चाको की जांच में जुटी पुलिस को अब तक कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं। इनमें फंडिंग को लेकर डेविड लगातार भ्रमित करने वाले जवाब दे रहा है। जबकि उसके ठिकाने से मिले संदिग्ध प्रशिक्षण माड्यूल, किताबें और दुर्गम इलाकों में उसकी सक्रियता के साक्ष्य, इलेक्ट्रानिक गैजेट्स से मिली जानकारी से कई राजफाश हुए हैं। पुलिस इस मामले में डेविड चाको और उसके संगठन से जुड़े लोगों से लगातार पूछताछ कर रही है।

पूछताछ की जा रही

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अंकिता शर्मा, पुलिस अधीक्षक का कहना है कि डेविड चाको के पास से कई तरह के संदिग्ध दस्तावेज, किताबें, प्रशिक्षण माड्यूल बरामद हुए हैं। इसके अलावा भी ट्रेवलिंग वाऊचर, गैजेट्स से डिजिटल साक्ष्य की भी जांच की जा रही है। डेविड चाको की पृष्ठभूमि, संपत्ति और फंडिंग का एंगल भी जांच में शामिल हैं। चाको और उससे संबंधित संस्थाओं, लोगों से पूछताछ की जा रही है।

 

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