भोपाल
प्रदेश में जल्द ही लोगों को हाईटेक तरीके से पानी मुहैया कराया जाएगा। इससे न तो पानी की बर्बादी होगी न ही अनियमित सप्लाई। दरअसल, अब प्रदेश की नगरीय निकायों में अत्याधुनिक वाटर मैनेजमेंट स्कॉडा सिस्टम लागू करने की तैयारी सरकार ने की है।
भोपाल और इंदौर नगर निगम में इस तकनीक पर अमल किया जा रहा है। नगरीय विकास आवास विभाग को भेजी रिपोर्ट के बाद अब इसे 16 नगर निगमों में लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस प्रोजेक्ट के पहले फेस में करीब 80 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।
नए सिरे से होगा अपडेट
स्कॉडा सिस्टम की रूपरेखा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत तैयार की गई थी। लेकिन स्मार्ट सिटी इस पर अमल नहीं कर पाया। लिहाजा भोपाल नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट पर तीन फेस में काम किया। भोपाल नगर निगम के सिटी इंजीनियर जेडए खान के अनुसार 23 लाख की आबादी वाले भोपाल शहर में कुल 250 पानी की टंकियां हैं। निगम का दावा है कि 137 पानी की टंकियों में इस सिस्टम को लागू किया गया है। यह सिस्टम भी एक सॉफ्टवेयर पर काम करता है। अब तक नगर निगम ने स्कॉडा सिस्टम पर करीब चार करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
सिस्टम का फायदा
पानी की बबार्दी पर पूरी तरह से रोक।
वाटर सप्लाई में मैनुअल वर्क के कारण कई समस्याओं का निदान।
पानी सप्लाई में बाधा का तत्काल सूचना।
नियमित और पर्याप्त पानी सप्लाई की डाटा समेत एक-एक जानकारी।
क्या है स्कॉडा सिस्टम
वाटर मैनेजमेंट के अत्याधुनिक तकनीक स्कॉडा सिस्टम है।
पानी की टंकियों को सेंसर उपकरणों से लैंस किया जाता है।
पानी की टंकी आखिर कितनी भरी, कितनी खाली और कब तक भर सकती है यह तमाम जानकारी आॅनलाइन पता चल जाती है।
टंकी में पानी भरने और सप्लाई का प्रेशर की भी जानकारी होती है।
वाटर सप्लाई में दिक्कत होने पर भी आॅनलाइन जानकारी मिल जाती है।
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