महिला सशक्तिकरण की प्रेरक कहानी: प्रीति पटेल ने स्व-सहायता समूह से हासिल की आर्थिक आज़ादी

रायपुर

शासन की महत्वाकांक्षी ग्रामीण आजीविका मिशन योजना ने आज गांव-गांव की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। ऐसी ही प्रेरक मिसाल बेमेतरा जिला की  ग्राम धोबानी खुर्द की श्रीमती प्रीति पटेल हैं, जिन्होंने स्व-सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ की, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई पहचान भी बनाई। आज वे “लखपति दीदी” के रूप में जानी जाती हैं और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं।

स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद बदली जिंदगी
           
श्रीमती प्रीति पटेल बताती हैं कि पूर्व में उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर थी और परिवार का भरण- पोषण करना कठिन हो रहा था। 01 जून 2018 को वे लक्ष्मी स्व-सहायता समूह से जुड़ीं, जिसके बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हुई। समूह से जुड़ने के पश्चात उन्हें सामुदायिक निवेश निधि (CIF) के रूप में 60 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इसके साथ ही बैंक से ऋण लेकर उन्होंने सब्जी उत्पादन एवं बड़ी (पापड़-बड़ी) निर्माण का कार्य प्रारंभ किया। नियमित आय आरंभ होने से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार हुआ।

स्वरोजगार से बढ़ी आय, अन्य महिलाओं को भी कर रहीं प्रेरित
        
प्रीति पटेल ने समूह की सहायता और शासन की योजनाओं के सहयोग से सब्जी उत्पादन के साथ-साथ बकरी पालन एवं गाय पालन का कार्य भी प्रारंभ की। आज वे एक सक्रिय सदस्य के रूप में गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने और स्व-सहायता समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वे आत्मविश्वास के साथ आर्थिक निर्णय लेने में सक्षम हुई हैं।

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शासन की योजनाओं से मिला संबल
            
राज्य शासन द्वारा संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन तथा लखपति दीदी अभियान के अंतर्गत महिलाओं को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण एवं विपणन सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना तथा उनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक करना है। प्रीति पटेल ने इन योजनाओं का लाभ उठाकर अपने जीवन की दिशा बदल दी।

आवास योजना से मिला पक्का घर
           
प्रीति पटेल को शासन की आवास योजना का भी लाभ प्राप्त हुआ। बैंक ऋण एवं शासकीय सहायता से उन्होंने अपना पक्का घर बनवाया। वे बताती हैं कि पहले वे कच्चे मकान में रहती थीं, किंतु आज उनके पास स्वयं का पक्का घर है। यह परिवर्तन उनके आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान में वृद्धि का प्रतीक है।

महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल
            
प्रीति पटेल की सफलता यह दर्शाती है कि यदि महिलाएं संगठित होकर स्व-सहायता समूह से जुड़ें और शासन की योजनाओं का लाभ उठाएं, तो वे आर्थिक रूप से सशक्त बनकर अपने परिवार और समाज की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। उनकी यह यात्रा ग्रामीण महिलाओं के लिए आशा, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की प्रेरक स्रोत है।

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