देश के करोड़ों किसानों के लिए हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर ने बासमती चावल की एक किस्म को नए तरीके से विकसित किया है। इस नई किस्म में न तो झुलसा रोग लगेगा और न ही इसके झड़ने की संभावना होगी। यानी, पर्यावरण की कैसी भी परिस्थिति हो, किसानों को फसल अच्छी मिलेगी। नई किस्म के पौधे का कद भी काफी छोटा होगा। इससे हवा या बारिश से इसके झड़ने का डर कम होगा। किस्म की पैदावार कितनी होगी, यह आने वाले दिनों में इसकी कटाई के बाद पता चलेगा। कृषि विवि ने अपने शोध में बासमती की इस किस्म को झुलसा रोग से रोग प्रतिरोधक शक्ति वाला बना दिया है।देश के करोड़ों किसानों के लिए हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर ने बासमती चावल की एक किस्म को नए तरीके से विकसित किया है। इस नई किस्म में न तो झुलसा रोग लगेगा और न ही इसके झड़ने की संभावना होगी। यानी, पर्यावरण की कैसी भी परिस्थिति हो, किसानों को फसल अच्छी मिलेगी। नई किस्म के पौधे का कद भी काफी छोटा होगा। इससे हवा या बारिश से इसके झड़ने का डर कम होगा। किस्म की पैदावार कितनी होगी, यह आने वाले दिनों में इसकी कटाई के बाद पता चलेगा। कृषि विवि ने अपने शोध में बासमती की इस किस्म को झुलसा रोग से रोग प्रतिरोधक शक्ति वाला बना दिया है।
अच्छी पैदावार की संभावना
कृषि विवि के कुलपति प्रो. एचके चौधरी ने कहा कि बासमती की विकसित की गई इस किस्म को झुलसा रोग का कोई खतरा नहीं होगा। साथ ही इसके पौधे का कद छोटा होने पर इसके झड़ने के संभावना भी कम होगी। उन्होंने कहा कि नए तरीके से शोध कर विकसित की गई बासमती की इस किस्म से अच्छी पैदावार होने की संभावना है, जो प्रदेश के किसानों की आर्थिकी मजबूत करेगा।

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