आत्मसमर्पित नक्सली डेढ़ महीने से सीख रहे सिलाई और ड्राइविंग, बालाघाट पुलिस की पहल से 14 परिवारों को मिली सरकारी नौकरी

बालाघाट 

बालाघाट पुलिस ने नक्सलियों को समाज की मुख्य धारा में वापस लाने और नक्सली हिंसा के पीड़ितों की मदद के लिए एक खास मुहिम शुरू की है। इसके तहत आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सली अब हथियार छोड़कर सिलाई और ड्राइविंग जैसे काम सीख रहे हैं.

पुलिस लाइन में फिलहाल 10 आत्मसमर्पित नक्सली (5 पुरुष और 5 महिला) सिलाई और ड्राइविंग का प्रशिक्षण ले रहे हैं। पिछले डेढ़ महीने से चल रही इस ट्रेनिंग में ये लोग शर्ट-पेंट सिलना और जेसीबी चलाना सीख रहे हैं ताकि वे खुद का रोजगार शुरू कर सकें। इनमें सुनीता ओयाम, सुरेंद्र, राकेश और सलीता जैसे कई पूर्व नक्सली शामिल हैं।

पीड़ित परिवारों को मिला सहारा
पुलिस ने उन 14 परिवारों की भी मदद की है जिनके सदस्यों को नक्सलियों ने 'मुखबिरी' के शक में मार दिया था। इन परिवारों के सदस्यों को आरक्षक (कॉन्स्टेबल) के पद पर नौकरी दी गई है।

सुमित उईके के पिता की हत्या 2002 में हुई थी। सुमित बताते हैं कि उन्हें पहले पुलिस की नौकरी से डर लगता था, लेकिन अब वे खुश हैं।

संजय कुमार पुसाम सिर्फ 8वीं तक पढ़े हैं, इन्होंने कभी सोचा नहीं था कि पिता की मौत के बाद उन्हें पुलिस विभाग में काम करने का मौका मिलेगा।

पुलिस अधीक्षक की पहल
एसपी आदित्य मिश्रा के नेतृत्व में चल रही इस पहल का मकसद हिंसा से प्रभावित लोगों का पुनर्वास करना और उन्हें आर्थिक सुरक्षा देना है। नौकरी पाने वालों में तेजाबसिंह, अनिल मेरावी, निशा राउत और डिलेश्वरी जैसे 14 लोग शामिल हैं, जो अब पुलिस बल का हिस्सा बनकर समाज की सेवा कर रहे हैं।

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