सार्थक ऐप पर सुनिश्चित होगी अगले सत्र से विद्यार्थियों की उपस्थिति : मंत्री परमार

सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी (नूतन) महाविद्यालय के वार्षिकोत्सव : स्वयं प्रभा 2026 का शुभारम्भ

भोपाल
वार्षिक स्नेह सम्मेलन, हर संस्थान में विद्यार्थियों के वर्ष भर की गतिविधियों एवं उपलब्धियों के सार्वजनिक प्रकटीकरण का सशक्त मंच है और महाविद्यालय की प्रतिष्ठा के प्रदर्शन का भी यह सुअवसर है। प्रदेश के समस्त महाविद्यालय बेहतर हों, शैक्षणिक एवं अकादमिक गुणवत्ता में उत्तरोत्तर वृद्धि हो, इसके लिए राज्य सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। कक्षाओं, प्रयोगशालाओं एवं पुस्तकालयों के सुदृढ़ीकरण के लिए संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कर रहे हैं और महाविद्यालयों में आवश्यक शैक्षणिक पदों की पूर्ति प्रक्रिया प्रचलन में है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने, सोमवार को भोपाल स्थित सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी (नूतन) महाविद्यालय में, महाविद्यालय के 'वार्षिकोत्सव : स्वयं प्रभा 2026' के शुभारम्भ अवसर पर कही। मंत्री परमार ने बेटियों को विविध महाविद्यालयीन गतिविधियों में प्रतिभागिता करने के लिए बधाई एवं उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं भी दीं।

उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं उनके हितों से जुड़े समस्त विषयों पर विस्तृत कार्य हो रहा है। परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में, संस्थानों की स्वायत्तता को लेकर भी लगातार कार्य कर रहे हैं ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की दिशा में प्रदेश, देश भर में अग्रणी भूमिका में स्थापित हो सके। परमार ने कहा कि सार्थक ऐप के माध्यम से, प्राध्यापकों की संस्थान में अधिकतम उपस्थिति सुनिश्चित की जा रही है। इस अनुक्रम में विद्यार्थियों की संस्थान परिसर में अधिकतम उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अगले सत्र से, सार्थक ऐप के माध्यम से उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी और विद्यार्थियों को अधिकतम उपस्थिति पर क्रेडिट भी दिया जाएगा। मंत्री परमार ने कहा कि संस्थान पर परिवेश पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण हो, यही हमारा मूल ध्येय है। मंत्री परमार ने कहा कि मूल्यांकन की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल मूल्यांकन की कार्ययोजना पर कार्य हो रहा है।

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मंत्री परमार ने कहा कि कृतज्ञता ही मानवता का वास्तविक आभूषण है। हम चाहे सफलता के किसी भी शिखर पर पहुँच जाएँ, अपनी माटी का ऋण और अपनों के साथ को कभी नहीं भूलना चाहिए। यही कृतज्ञता का भाव 'लोक-कल्याण' की नींव रखता है। मंत्री परमार ने कहा कि शिक्षा, विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास का मुख्य माध्यम है और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। मंत्री परमार ने वर्तमान परिदृश्य में, शिक्षक-विद्यार्थी परंपरा के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अपने पूर्वजों के परंपरागत ज्ञान के आधार पर, भारत स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, खाद्यान्न सहित हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर होकर, अन्य देशों की पूर्ति में भी सामर्थ्यवान बनेगा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने यह महत्त्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुरेन्द्र बिहारी गोस्वामी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए अतिथियों का अभिनंदन किया। प्रो. गोस्वामी ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनकी प्रतिभा को निखारने का सशक्त मंच प्रदान करते हैं। वार्षिकोत्सव "स्वयंप्रभा-2026" के प्रथम दिवस को "पारंपरिक दिवस" के रूप में मनाया गया, जिसमें छात्राओं ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पारंपरिक वेशभूषा के माध्यम से प्रस्तुत किया। "अतुल्य भारत" थीम पर आधारित प्रस्तुति में 21 छात्राओं ने भाग लेकर देश की विविधता और सांस्कृतिक वैभव का आकर्षक प्रदर्शन किया। इस अवसर पर एनसीसी की 28 छात्राओं द्वारा "ऑपरेशन सिंदूर" पर आधारित नृत्य नाटिका ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। साथ ही, प्रदेश की जनजातीय संस्कृति पर आधारित कर्मा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति ने वातावरण को जीवंत बना दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रंजना उपाध्याय एवं आभार प्रदर्शन छात्रसंघ प्रभारी डॉ. नीना श्रीवास्तव द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं छात्राएं उपस्थित थीं।

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