घोटाला: सूर्यकांत के करीबी देवेंद्र डडसेना को नहीं मिली बेल, हाईकोर्ट ने कहा- आर्थिक अपराध समाज और अर्थव्यवस्था के लिए घातक

बिलासपुर
छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने कोयला लेव्ही घोटाले के मास्टर माइंड सूर्यकांत तिवारी के करीबी देवेंद्र डडसेना की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस एनके व्यास की सिंगल बेंच ने कहा, आर्थिक अपराध गंभीर श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में जमानत देने में विशेष सावधानी बरतनी जरूरी है। यह समाज और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बेहद घातक है।

कोयला घोटाले में EOW और ACB ने आईपीसी की धारा 384, 420, 120-बी, 467, 468, 471 और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट PMLA की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। प्रवर्तन निदेशालय ED की जांच में सामने आया है, कोयला परिवहन पर अवैध वसूली का बड़ा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। इसके जरिए प्रति टन 25 रुपए की अवैध वसूली की जा रही थी।

जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच सिंडिकेट की ओर से तकरीबन 540 करोड़ रुपए की अवैध वसूली की गई। इस पूरे मामले में कई नौकरशाह, कारोबारी और अन्य लोग शामिल पाए गए हैं।

मास्टरमाइंड और घोटाले के किंगपीन सूर्यकांत का करीबी है देवेंद्र डडसेना
आरोप है, कोल लेव्ही के मास्टरमाइंड सूर्यकांत तिवारी ने अफसरों और नेताओं की सरपरस्ती और मिलीभगत से 570 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली कराई। वसूली का काम देवेंद्र डडसेना और एक अन्य व्यक्ति संभालते थे। लेन-देन के लिए वॉट्सऐप पर पाल, दुर्ग, वीकली, टावर और जुगनू नाम से ग्रुप बनाए गए थे। पूरी बातचीत कोडवर्ड में की जाती थी।

जांच एजेंसियों द्वारा हाई कोर्ट में पेश दस्तावेजों और केस डायरी के अनुसार देवेंद्र डडसेना कथिततौर पर सिंडिकेट की अहम कड़ी था, उस पर अवैध वसूली की रकम लेने और बांटने का आरोप है। जब्त की गई डायरी और गवाहों के बयानों में लगभग 52 करोड़ रुपए के लेन-देन का जिक्र है।

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मास्टरमाइंड सूर्यकांत का करीबी रहा है देवेंद्र डडसेना
आरोप है कि मास्टरमाइंड सूर्यकांत तिवारी ने अफसरों और नेताओं की मिलीभगत से 570 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली कराई। वसूली का काम देवेंद्र डडसेना और एक अन्य व्यक्ति संभालते थे। लेन-देन के लिए वॉट्सऐप पर पाल, दुर्ग, वीकली, टावर और जुगनू नाम से ग्रुप बनाए गए थे, जिनमें बातचीत में कोडवर्ड का इस्तेमाल किया जाता था।

आरोपी देवेंद्र करता था पैसों की वसूली और वितरण
हाईकोर्ट में पेश दस्तावेजों और केस डायरी के अनुसार देवेंद्र डडसेना कथित तौर पर इस सिंडिकेट की अहम कड़ी था, उस पर अवैध वसूली की रकम लेने और बांटने का आरोप है। जब्त की गई डायरी और गवाहों के बयानों में लगभग 52 करोड़ रुपए के लेन-देन का जिक्र है।

जांच में यह भी सामने आया कि यह राशि राजनीतिक और अन्य खर्चों में उपयोग की गई। आरोपी की ओर से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है और कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है, केवल सह-आरोपी के बयान हैं।

वहीं राज्य सरकार ने दलील दी कि मामला गंभीर आर्थिक अपराध का है, आरोपी की भूमिका महत्वपूर्ण और सक्रिय रही है। साक्ष्य से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है और जांच अभी जारी है, इसलिए जमानत देना उचित नहीं है।

जांच में यह भी सामने आया कि उगाही की गई धनराशि का उपयोग राजनीतिक और अन्य खर्चों में की गई। आरोपी की ओर से कहा गया है, उसे झूठा फंसाया गया है और कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है, केवल सह-आरोपी के बयान हैं। राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के ला अफसरों ने कहा, मामला गंभीर आर्थिक अपराध का है, आरोपी की भूमिका महत्वपूर्ण और सक्रिय रही है। साक्ष्य से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है और जांच अभी जारी है, इसलिए जमानत देना उचित नहीं है।

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हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी- आर्थिक अपराध, समाज और अर्थव्यवस्था के लिए खतरा
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, आर्थिक अपराध अलग श्रेणी के होते हैं। समाज और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डालते हैं। ये अपराध योजनाबद्ध और संगठित तरीके से निजी लाभ के लिए किए जाते हैं। आरोपी की भूमिका गंभीर है और साक्ष्यों से सिद्ध हो रहा है। अपराध की गंभीरता और रकम अत्यधिक होने के कारण जमानत देना न्याय के हित में नहीं होगा। इसी आधार पर कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी।

क्या है छत्तीसगढ़ का कोयला लेव्ही स्कैम
जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय ED का दावा है, छत्तीसगढ़ में कोयला घोटाला किया गया है। इस मामले में 36 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। ईडी का आरोप है कि कोयले के परिचालन, ऑनलाइन परमिट को ऑफलाइन करने समेत कई तरीकों से करीब 570 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध वसूली की गई है।

छत्तीसगढ़ में अवैध कोल लेवी वसूली का मामला ईडी की रेड में सामने आया था। जांच एजेंसी का दावा है, कोल परिवहन में कोल व्यापारियों से वसूली करने के लिए ऑनलाइन मिलने वाले परमिट को ऑफलाइन कर दिया गया था। खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक आईएएस समीर विश्नोई ने 15 जुलाई 2020 को इसके लिए आदेश जारी किया था।

2 पूर्व मंत्रियों, विधायकों समेत 36 पर FIR
कोयला लेव्ही घोटाले में ED की रिपोर्ट पर ACB, EOW ने दो पूर्व मंत्रियों, विधायकों सहित 36 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। जिस पर अब ACB-EOW की टीम जांच कर रही है। इस मामले में IAS रानू साहू के अलावा IAS समीर विश्नोई, सौम्या चौरसिया, जेडी माइनिंग एसएस नाग और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को गिरफ्तार किया गया था।

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पढ़िए सूर्यकांत तिवारी की क्या थी भूमिका

ईडी की जांच के मुताबिक, सूर्यकांत तिवारी ने कोयला परिवहन और परमिट प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं के जरिए करोड़ों की अवैध वसूली का मास्टरमाइंड माना गया है। आरोप है, प्रति टन 25 रुपए की दर से वसूली की जाती है और वसूली की रकम उसके कर्मचारियों के जरिए जमा कराई जाती थी। इसके बदले संबंधित कोल व्यापारियों को खनिज विभाग से परमिट जारी किए जाते थे।

2 पूर्व मंत्रियों, विधायकों समेत 36 पर FIR
छत्तीसगढ़ में कोयला घोटाले मामले में ED की रिपोर्ट पर ACB /EOW ने दो पूर्व मंत्रियों, विधायकों सहित 36 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। जिस पर अब ACB-EOW की टीम जांच कर रही है। इस मामले में IAS रानू साहू के अलावा IAS समीर विश्नोई, सौम्या चौरसिया, जेडी माइनिंग एसएस नाग और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को गिरफ्तार किया गया था।

सूर्यकांत तिवारी की क्या थी भूमिका
ईडी की जांच के मुताबिक सूर्यकांत तिवारी ने कोयला परिवहन और परमिट प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं के जरिए करोड़ों की अवैध वसूली का मास्टरमाइंड माना गया है। आरोप है कि प्रति टन 25 रुपए की दर से वसूली कर रकम उसके कर्मचारियों के जरिए जमा कराई जाती थी, और इसके बदले संबंधित व्यापारियों को खनिज विभाग से परमिट जारी किए जाते थे।

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