जबलपुर के 5 अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन कैंसल, 240 में से 121 क्लीनिक भी किए गए बंद

जबलपुर
 जबलपुर शहर के पांच निजी अस्पतालों का पंजीयन निरस्त कर दिया गया है। इसी तरह जिले के 240 निजी क्लीनिकों का पंजीयन नवीनीकरण प्रस्तावित था, पंजीयन की आवश्यक औपचारिकता पूर्ण न करने पर कुल 121 क्लीनिकों का संचालन बंद करने का आदेश मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी ने दिए हैं।

इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के नर्सिंग होम शाखा प्रभारी डॉ. आदर्श विश्नोई ने बताया कि नियमानुसार निजी अस्पतालों व क्लीनिकों को पंजीयन तीन साल की अवधि के लिए प्रदान किया जाता है। निर्धारित अवधि पूर्ण होने पर संबंधित संस्थानों को पंजीयन नवीनीकरण हेतु आवेदन करना अनिवार्य है।

इस साल नवीनीकरण की प्रक्रिया पोर्टल के माध्यम से एक जनवरी से 28 फरवरी तक संचालित हुई। इसके बाद मार्च में संबंधित अस्पतालों व क्लीनिकों का निरीक्षण किया गया और आवश्यक सुविधाओं का आकलन किया गया।

55 में से पांच बंद, जिसमें दो ने स्वयं अस्पताल में लगाया ताला
वर्ष 2025-26 में कुल 55 अस्पतालों का पंजीयन नवीनीकरण प्रस्तावित था, जिसमें दो अस्पतालों बटालिया आई हास्पिटल, सरकार हास्पिटल ने स्वयं अस्पताल बंद करने आवेदन प्रस्तुत किया। वहीं एक अस्पताल नामदेव नर्सिंग होम ने आवेदन ही नहीं किया।

जबकि संकल्प हॉस्पिटल ने दस्तावेज नगर निगम व अन्य विभागों से सत्यापित नहीं कराए। इस तरह एससी गुप्ता मेमोरियल हॉस्पिटल व रिसर्च सेंटर में निरीक्षण के दौरान उपयुक्त स्टाफ उपस्थित नहीं था। जिसके बाद अब इनका संचालन नहीं हो सकेगा।

89 क्लीनिक ने आवेदन नहीं किया, 32 के पास दस्तावेज कम
जबलपुर जिले में कुल 240 निजी क्लीनिकों का पंजीयन नवीनीकरण इस बार प्रस्तावित था। जिनमें से 89 क्लीनिकों द्वारा नवीनीकरण के लिए आवेदन ही प्रस्तुत नहीं किया। जबकि 32 क्लीनिक ने नियमानुसार पूरे दस्तावेज ही नवीनीकरण टीम को नहीं सौंपे। जिसके चलते पंजीयन नवीनीकरण नहीं हो सका।

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पंजीयन नवीनीकरण प्रक्रिया को ऐसे समझें
स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पताल व क्लीनिकों संचालन के लिए नियमानुसार प्रत्येक तीन साल में एक बार पंजीयन नवीनीकरण प्रक्रिया से गुजरना होता है। अस्पताल-क्लीनिकों के पंजीयन का नवीनीकरण एक अनिवार्य प्रक्रिया है।

प्रदेश के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म
मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 126 अस्पतालों की मान्यता खत्म कर दी है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में यह कदम उन अस्पतालों पर उठाया गया है, जिन्होंने NABH सर्टिफिकेट की जानकारी तय समय में नहीं दी।

आयुष्मान कार्यालय ने पहले अस्पतालों को नोटिस देकर मौका दिया था, लेकिन इन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। रविवार 12 बजे इन अस्पतालों को नोटिस देकर जानकारी दी जाएगी। अब इन अस्पतालों में आयुष्मान के तहत मुफ्त इलाज नहीं मिलेगा।

4 शहरों में 398 में से 126 अस्पताल प्रभावित
प्रदेश के चार बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में कुल 398 अस्पताल योजना से जुड़े हैं। इनमें से 126 अस्पताल NABH सर्टिफिकेट की जानकारी नहीं दे सके, जिस कारण उन पर कार्रवाई हुई। इनमें भोपाल के 51, इंदौर-30, ग्वालियर-33 और जबलपुर के 12 अस्पताल शामिल हैं।

आयुष्मान CEO बोले- मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा
आयुष्मान भारत मध्यप्रदेश के CEO डॉ. योगेश भरसट ने कहा, यह कदम अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उठाया गया है। नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है, ताकि मरीजों को सुरक्षित और बेहतर इलाज मिल सके।

एनएबीएच सर्टिफिकेट न देने वाले अस्पतालों की आयुष्मान संबद्धता रद्द कर दी गई है। कई नोटिस देने के बावजूद डॉक्यूमेंट नहीं जमा हुए। निजी अस्पतालों का कहना है कि सर्टिफिकेट प्रक्रिया महंगी और लंबी है, इसलिए छोटे अस्पताल समय पर पूरा नहीं कर पाए।

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डॉ. योगेश भरसट ने कहा, अब इन अस्पतालों के मरीजों को अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किया जाएगा। नए मरीजों के क्लेम स्वीकार नहीं होंगे। पुराने पेमेंट के बाद भी सर्टिफिकेट जमा होने तक ये अस्पताल इंपैनल्ड सूची में नहीं लौटेंगे।

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