भोपाल
मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी पड़ रही है। इससे बच्चों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। जबर्दस्त गर्मी के कारण बच्चों की सेहत पर पड़ते बुरे असर की शिकायतें बढ़ गई हैं। राजधानी भोपाल में ही स्कूलों में अनेक विद्यार्थी बीमार हुए हैं। ऐसे में अभिभावकों ने स्कूलों की छुट्टी घोषित करने की मांग की है। मामले में कलेक्टर से शिकायत करते हुए उन्हें पत्र सौंपा गया है। इस बीच कई प्राइवेट स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। इधर तेज गर्मी को देखते हुए जिला शिक्षा विभाग ने स्कूलों में अवकाश घोषित करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। कलेक्टर की मंजूरी मिलते ही आदेश लागू कर दिया जाएगा।
दोपहर में वैन और बस से वापसी ज्यादा भारी पड़ रही
अभिभावकों ने बताया कि दोपहर में वैन और बस से वापसी ज्यादा भारी पड़ रही है। गर्मी में ये गर्म चैंबर की तरह प्रतीत हो रही है। इनमें दो से तीन घंटे का सफर तय कर बच्चे घर पहुंचते हैं।
पैरेंट्स वॉइस एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेक सिंह बताते हैं कि बढ़ते तापमान के बीच स्कूलों में बच्चों की दोपहर में आवाजाही सबसे ज्यादा
पैरेंट्स वॉइस एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेक सिंह बताते हैं कि बढ़ते तापमान के बीच स्कूलों में बच्चों की दोपहर में आवाजाही सबसे ज्यादा है। शहर में अधिकांश स्कूल बाहरी क्षेत्रों में हैं। यहां तक आने-जाने में लगने वाला समय ही तीन से चार घंंटे है। 12 बजे छुट्टी के बाद डेढ़ से दो बजे बच्चे घर पहुंचते हैं। यही हाल सुबह है।
आधा दर्जन स्कूलों ने नर्सरी व प्राइमरी कक्षाओं का समय बदला, अभिभावकों को मैसेज से जानकारी दी:
राजधानी के आधा दर्जन स्कूलों ने नर्सरी व प्राइमरी कक्षाओं का समय बदला है। अपने स्तर पर निर्णय लेते हुए कक्षा का समय 10.30 बजे किया गया। अभिभावकों को मैसेज से यह जानकारी दी गई। बाकी का समय पहले की ही तरह है।
जिला शिक्षा अधिकारी नरेन्द्र अहिरवार ने बताया कि अभिभावकों की शिकायत के आधार पर मामले में प्रस्ताव तैयार किया
भोपाल के जिला शिक्षा अधिकारी नरेन्द्र अहिरवार ने बताया कि अभिभावकों की शिकायत के आधार पर मामले में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यह प्रस्ताव कलेक्टर को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उनकी अनुमति मिलते ही स्कूलों में अवकाश की घोषणा कर दी जाएगी।
2000 स्कूलों के बच्चे गर्मी के कारण आने जाने में परेशान
राजधानी के 2000 स्कूलों के बच्चे गर्मी के कारण आने जाने में परेशान हैं। अब नजरें कलेक्टर के अगले आदेश पर टिकी हैं।
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